Sunday , 25 October 2020

मानव द्वारा खड़े किए गए संकट के लिए भगवान को दोष मत दीजिए : चिदंबरम


नई दिल्ली (New Delhi) . अर्थव्यवस्था पर कोरोना (Corona virus) के प्रभाव को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि “मानव द्वारा खड़े किए गए संकट के लिए भगवान को दोष मत दीजिए.” वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा था कि अर्थव्यवस्था कोविड-19 (Covid-19) महामारी (Epidemic) से प्रभावित हुई है, जो कि दैवीय घटना है.

पहली तिमाही की जीडीपी के आंकड़े सामने आने के बाद पूर्व वित्त मंत्री ने एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में सरकार (Government) के राहत पैकेज को एक “मजाक” बताया है. चिदंबरम ने कहा, “भगवान को दोष मत दो. बल्कि आपको तो भगवान को धन्यवाद कहना चाहिए. भगवान ने देश के किसानों को आशीर्वाद दिया है. कोरोना (Corona virus) महामारी (Epidemic) एक प्राकृतिक आपदा है, लेकिन आप, महामारी (Epidemic) को, जो कि एक प्राकृतिक आपदा है, उसे मनुष्य निर्मित आपदा से जोड़ रहे हैं.”

निर्मला सीतारमण ने राज्यों की ओर से जीएसटी क्षतिपूर्ति की मांग करने पर राजस्व में कमी के लिए महामारी (Epidemic) को जिम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद उनकी आलोचना की गई थी. वित्त मंत्री ने कहा था, “इस साल हम असाधारण स्थिति का सामना कर रहे हैं. हम दैवीय घटना का सामना कर रहे हैं, जहां हमें अर्थव्यवस्था में गिरावट भी देखनी पड़ सकती है.

जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद देश की आर्थिक हालत को लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने कहा था कि आगामी तिमाहियों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और भारत की इकोनॉमी में ‘V’ शेप रिकवरी होगी. इस पर भी चिदंबरम ने सवाल उठाया है. चिदंबरम ने हैरानी जताते हुए कहा, “मुझे नहीं पता कि कोई मुख्य आर्थिक सलाहकार को गंभीरता से लेता है या नहीं. आखिरी बार प्रधानमंत्री के साथ उनकी बातचीत कब हुई थी? वह महीनों से अनुमान लगा रहे हैं कि अर्थव्यवस्था में वी-शेप की रिकवरी होगी.”

पूर्व वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार (Government) को या तो कर्ज लेना चाहिए या फिर अपने घाटे को कम करना चाहिए. आम बोलचाल की भाषा में उन्होंने कहा कि घाटे को कम करने के लिए सरकार (Government) को मुद्रा छापनी चाहिए. उन्होंने कहा, “यह समय खर्च, मांग को बढ़ाने और लोगों के हाथ में पैसा पहुंचाने का है ताकि उपभोग को बढ़ाया जा सके.”