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Wednesday, 28 October 2026
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केरल हाईकोर्ट से पिनाराई विजयन को बड़ी राहत, सीएमआरएल मामले में विजिलेंस जांच पर लगाई रोक

केरल हाईकोर्ट से पिनाराई विजयन को बड़ी राहत, सीएमआरएल मामले में विजिलेंस जांच पर लगाई रोक

कोच्चि, 26 अक्टूबर . केरल के पूर्व Chief Minister पिनाराई विजयन को बड़ी राहत देते हुए, केरल उच्च न्यायालय ने Monday को अपने एकल न्यायाधीश के एक आदेश पर रोक लगा दी है. इस आदेश में सीएमआरएल-एक्सलॉजिक मामले में उनके, उनकी बेटी वीणा, और उनके दामाद तथा सीपीआई-एम विधायक मोहम्मद रियास के खिलाफ विजिलेंस First Information Report दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.

न्यायमूर्ति के. एम. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने 9 अक्टूबर के आदेश को चुनौती देने वाले उन तीन लोगों और अन्य की अपीलों को स्वीकार कर लिया है.

अदालत ने एकल न्यायाधीश के फैसले पर रोक लगा दी और निर्देश दिया कि अगले आदेश तक First Information Report की जांच रोक दी जाए.

अदालत ने इस मामले की अंतिम सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तारीख तय की है.

यह घटनाक्रम Supreme Court के 21 अक्टूबर के उस हस्तक्षेप के बाद हुआ है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि विजयन और अन्य लोग एकल न्यायाधीश के आदेश को खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे सकते हैं.

Supreme Court ने जांच पर अंतरिम रोक भी लगा दी थी, ताकि हाई कोर्ट उनकी अपीलों पर सुनवाई कर सके. Monday की सुनवाई के दौरान, अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश ने उन लोगों की बात सुने बिना ही First Information Report दर्ज करने का आदेश दे दिया, जो इससे सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे थे.

उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया.

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर First Information Report दर्ज करने का निर्देश दिया, जबकि यह निर्णय आमतौर पर जांच एजेंसी को लेना चाहिए.

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या Enforcement Directorate (ईडी) द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री से ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत कोई संज्ञेय अपराध बनता है. अपीलकर्ताओं ने आगे कहा कि वीणा की कंपनी ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ से जुड़े लेन-देन के आधार पर विजयन या रियास पर आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती.

उन्होंने भ्रष्टाचार की जांच शुरू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया के संबंध में भी आपत्तियां उठाईं. राज्य Government ने अदालत को बताया कि उसने ईडी से मिली सामग्री की प्रारंभिक जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया था.

महाधिवक्ता ने कहा कि बाद में, एकल न्यायाधीश के निष्कर्षों को देखते हुए Government ने First Information Report दर्ज करने का निर्णय लिया. ईडी ने जांच पर रोक लगाने का विरोध करते हुए तर्क दिया कि जब किसी जानकारी से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो राज्य के लिए First Information Report दर्ज करना अनिवार्य होता है.

मूल याचिकाकर्ता के वकील ने भी इस कानूनी कार्यवाही का बचाव किया.

यह मामला ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) और ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ के बीच वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है.

ईडी ने इन लेन-देन से जुड़ी सामग्री राज्य Police के साथ साझा की थी. 9 अक्टूबर को, एकल न्यायाधीश ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो को विजयन, वीणा, रियास और अन्य लोगों के खिलाफ First Information Report दर्ज करने का निर्देश दिया और एसआईटी के जरिए प्रारंभिक जांच कराने के Government के फैसले को रद्द कर दिया.

इस ताजा आदेश में आरोपों के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं लिया गया है. इनकी जांच अंतिम सुनवाई के दौरान की जाएगी.

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एससीएच/एबीएम

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