एसआईआर के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का खेल, देशभर में कटे 13 करोड़ नाम: मंगनी लाल मंडल

Patna, 27 अक्टूबर . राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए और इस प्रक्रिया के पीछे गलत मंशा रही है. मंडल ने भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च को भी पाखंड बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रदर्शन, धरना और विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है. इसके अलावा, उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और चीन से संबंधित कथित वीडियो और एआई के दुरुपयोग पर भी चिंता जताई.
एसआईआर और फॉर्म-6 को लेकर चुनाव आयोग की ओर से दिए गए हलफनामे पर मंगनी लाल मंडल ने कहा कि विवाद को हवा देने में आयोग की भूमिका रही है. आयोग के दो सदस्यों ने 14 पत्र लिखे थे, जिनमें एक पत्र कैबिनेट सचिव को भी भेजा गया था. यह पत्र नहीं लिखा जाना चाहिए था. चुनाव आयुक्तों के अधिकारों में कटौती की गई है और फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए. मंडल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि Government के प्रभाव के कारण आयोग के भीतर की स्थिति को संभालने और जवाब तैयार करने का काम किया गया. एसआईआर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना रहा है.
उन्होंने कहा कि पहले भी चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण होता था, लेकिन तब निर्धारित तारीख तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पात्र लोगों के नाम जोड़े जाते थे. वहीं, जिनकी मृत्यु हो गई हो, जो देश छोड़कर चले गए हों या जिनकी मतदाता बनने की पात्रता समाप्त हो गई हो, उनके नाम हटाए जाते थे. पहले ऐसी प्रक्रिया में सीमित संख्या में नाम हटाए जाते थे, जबकि अब बड़े पैमाने पर नाम हटाने की कार्रवाई हो रही है. देश में 13 करोड़ नाम हटाने और बिहार में 69 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने का मामला गंभीर है. मंडल ने पश्चिम बंगाल में भी मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले की वास्तविकता सामने आनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के दोनों सदस्यों को प्रभावित करके मामले को संभालने की कोशिश की गई है.
भाजपा की ओर से प्रस्तावित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ मार्च पर राजद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जुलूस निकालना, प्रदर्शन करना, धरना देना, सत्याग्रह करना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना नागरिकों के मौलिक अधिकारों में शामिल है. जिस तरह नागरिकों को पूजा करने, अपनी पसंद के धर्म में विश्वास रखने, देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने और संपत्ति हासिल करने का अधिकार है, उसी तरह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार भी है. वोट नागरिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है और इस पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है. यदि भाजपा विपक्ष के विरोध के जवाब में लोकतंत्र के नाम पर मार्च निकाल रही है तो यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण प्रवृत्ति है. सत्ता में बने रहने के लिए नागरिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.
अरुणाचल प्रदेश और चीन से संबंधित कथित वीडियो पर मंडल ने कहा कि इस मामले में विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का दुरुपयोग भ्रम और गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है. एआई का इस्तेमाल रचनात्मक कार्यों के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसका दुरुपयोग विनाशकारी परिणाम भी ला सकता है. मंडल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में चीन से संबंधित जो खबरें सामने आ रही हैं, उनमें अलग-अलग तरह की बातें कही जा रही हैं. उन्होंने वीडियो में ड्रोन उड़ाए जाने, चीनी सैनिकों के भारतीय क्षेत्र में कई किलोमीटर भीतर आने और भारतीय सेना द्वारा उन्हें खदेड़ने जैसे दावों का उल्लेख किया. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ये दृश्य एआई से बनाए गए हैं तो भ्रम की स्थिति बनी रहेगी और यदि वास्तविक हैं तो यह सेना की कार्रवाई से जुड़ा मामला होगा.
उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से कोई भी पक्ष ऐसे दृश्य दिखा सकता है, जिससे सही और गलत का अंतर करना मुश्किल हो सकता है.
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पीएसके/डीकेपी


