
हुब्बल्ली, 17 अप्रैल . कर्नाटक के हुब्बल्ली में समर्थन मूल्य केंद्रों पर चना खरीद के लिए बोरी (गन्नी बैग) की कमी के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. किसान लगातार विरोध जता रहे हैं और उनका कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है और उनकी फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है.
किसानों के लंबे विरोध के बाद हाल ही में जिले में मूंगफली की खरीद समर्थन मूल्य पर शुरू हुई थी, लेकिन चना खरीद की व्यवस्था लॉजिस्टिक समस्याओं में फंस गई है. खरीद केंद्रों पर खाली बोरियों की कमी के कारण फसल को सुरक्षित रखने में दिक्कत हो रही है.
स्थिति यह है कि खरीद केंद्रों के बाहर चने के ढेर खुले में पड़े नजर आ रहे हैं. कई मामलों में किसानों को अपने घर से पुरानी बोरियां लाकर खुद ही फसल भरकर केंद्रों पर छोड़नी पड़ रही है, जो हालात की गंभीरता को दर्शाता है.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चना खरीद के लिए 36 प्राथमिक कृषि सहकारी समिति केंद्रों पर कुल 23,393 किसानों ने पंजीकरण कराया है. लेकिन अब तक केवल 6,400 किसान ही अपनी उपज बेच पाए हैं और 24 मार्च तक करीब 1,14,078 क्विंटल चना खरीदा गया है. किसानों का आरोप है कि लगभग 60 प्रतिशत फसल अब भी खरीद केंद्रों के बाहर पड़ी हुई है.
किसान नेता हेमन गौड़ा ने अधिकारियों की “गैर-जिम्मेदाराना रवैये” की आलोचना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में फसल उगाने वाले किसानों को अब खरीद के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. एक अन्य किसान शिवानंद ने कहा कि बोरियों की कमी के कारण पूरी प्रक्रिया ठप हो गई है और किसान बेहद परेशान हैं.
किसानों ने यह भी बताया कि बेमौसम बारिश का खतरा मंडरा रहा है, जिससे खुले में रखी फसल को भारी नुकसान हो सकता है. किसान चेनप्पा गौड़ा ने कहा, “अगर बारिश हो गई तो पूरी फसल खराब हो जाएगी. हम कई दिनों से खरीद केंद्रों के सामने बैठे हैं.”
धारवाड़ जिला में भी खरीद के आंकड़ों में असमानता देखने को मिली है. जहां नवलगुंड में सबसे ज्यादा खरीद हुई, वहीं हुब्बली तालुक में खरीद बेहद कम रही. उदाहरण के तौर पर, हुब्बली तालुक के कोलिवाड़ा नंबर-2 केंद्र पर केवल 72 क्विंटल खरीद हुई, जबकि धारवाड़ तालुक के हेब्बल्ली केंद्र पर 262 क्विंटल चना खरीदा गया.
किसानों का कहना है कि पंजीकरण के एक महीने बाद भी कई लोगों को उपज लाने के लिए बुलावा नहीं आया है. कुछ मामलों में सहकारी समितियां किसानों द्वारा जमा कराई गई भरी बोरियां भी नहीं उठा रही हैं.
अधिकांश किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है, ऐसे में खरीद में देरी से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और कई किसान मजबूरी में खुले बाजार में कम दाम पर फसल बेचने पर विचार कर रहे हैं.
किसानों ने Government से तुरंत पर्याप्त बोरियां उपलब्ध कराने और खरीद प्रक्रिया को सुचारू करने की मांग की है, ताकि उन्हें और नुकसान से बचाया जा सके.
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डीएससी