मांसाहार और शराब की बिक्री बंद हो, ऐसा नहीं करने पर विदेश में गलत संदेश जाएगा : निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख

नासिक, 29 अक्टूबर . नासिक कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत मुरलीधर जी महाराज ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि घाटों की सीढ़ियों को अधिक चौड़ा और सुविधाजनक बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें. उन्होंने कुंभ क्षेत्र के आसपास मांस, मछली और शराब की बिक्री बंद करने का भी सुझाव दिया, ताकि भगवान राम की तपोभूमि की पवित्रता बनी रहे. उन्होंने प्रशासन और साधु-संतों के आपसी सहयोग से कुंभ को दिव्य और भव्य बनाने पर जोर दिया.
निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत मुरलीधर जी महाराज ने कहा, “निरीक्षण के बाद समझ आ रहा है कि सीढ़ियों की बनावट में सुधार करने की जरूरत है. इसके अलावा, अभी जो कार्यक्रम हैं, उनमें यहां मांस, मछली और शराब की बिक्री भी बंद होनी चाहिए, क्योंकि यहां देश-विदेश से भक्त आएंगे. यदि कुंभ क्षेत्र के आसपास मांस, मछली और शराब बिकते दिखेंगे, तो विदेशों में यह संदेश जाएगा कि भगवान राम की तपोभूमि और इतनी पवित्र जगह पर भी यह सब बिकता है. यह हमारी परंपरा और सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है. ऐसा नहीं होना चाहिए.”
उन्होंने कहा कि अभी तक हमें जमीन नापकर आवंटित नहीं की गई है. जब जमीन का आवंटन होगा, तब हम अपनी व्यवस्थाएं ठीक से कर पाएंगे और कुंभ की तैयारी आगे बढ़ा पाएंगे. यदि नासिक में भी प्रयागराज जैसा भव्य और दिव्य कुंभ लगाना है, तो यहां के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और Government को इस क्षेत्र का और विस्तार करना चाहिए.
निर्वाणी अखाड़ा प्रमुख महंत मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि हमारे एक अखाड़े में ही लगभग 50 हजार साधु-संत हैं और कुल मिलाकर 9 से 10 हजार खालसा हैं. इतने लोगों के ठहरने की व्यवस्था कहां होगी? यह एक बड़ा प्रश्न है. सीढ़ियां चौड़ी और सुरक्षित बनाई जानी चाहिए. जब हमारे संतों का समूह एक साथ 100, 200, 500 या 1,000 की संख्या में स्नान के लिए उतरता है, तो भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है. यदि कोई दुर्घटना हो गई, तो कुंभ की बदनामी होगी. इसलिए प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से काम करना चाहिए. एक-एक सीढ़ी के बीच अतिरिक्त स्टेप बनाए जाएं ताकि संत और श्रद्धालु आराम से स्नान कर सकें.
महंत मुरलीधर जी महाराज ने कहा कि देश-विदेश में यह संदेश जाना चाहिए कि नासिक कुंभ दिव्यता और भव्यता का प्रतीक है. नासिक का अपना धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि भगवान राम यहां आए थे और शूर्पणखा की नाक कटने की घटना के कारण ही इस स्थान का नाम नासिक पड़ा. इस स्थान के महत्व को अधिक बढ़ाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि हम पत्रकार बंधुओं से भी आग्रह करते हैं कि वे इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएं, ताकि Government अपनी तैयारियों को और बेहतर बना सके. नासिक का कुंभ तभी भव्य होगा जब साधु-संत और प्रशासन एक-दूसरे का सहयोग करेंगे. साधु प्रशासन का सहयोग करें और प्रशासन साधुओं का सहयोग करे, तभी कुंभ सफल होगा.
उन्होंने कहा कि अभी कुंभ मेला मंत्री भी आने वाले हैं. हम उनके सामने भी सभी बातें रखेंगे. Maharashtra Government में मंत्री गिरीश महाजन हैं, उनसे भी हमें सहयोग की अपेक्षा है. यदि सनातन धर्म का इतना बड़ा पर्व बड़े अंतराल के बाद आयोजित होता है, तो इसकी तैयारियां भी उसी स्तर की होनी चाहिए.
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केके/एबीएम


