आंध्र प्रदेश: कुरनूल में पारंपरिक लाठी लड़ाई में एक व्यक्ति की मौत, 100 से अधिक लोग घायल

कुरनूल, 22 अक्टूबर . आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में दशहरा उत्सव के दौरान लाठी से लड़ी जाने वाली पारंपरिक लड़ाई में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हो गए. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी Wednesday देर रात होलगोंडा मंडल (ब्लॉक) के देवरागाट्टू गांव में आयोजित ‘देवरागाट्टू बन्नी उत्सव’ के दौरान दो गुटों ने एक-दूसरे पर लाठियों से हमला कर दिया.
घायलों को अडोनी और अलूर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 10 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. जिन्हें मामूली चोटें आईं, उनका इलाज प्रशासन की ओर से बनाए गए एक अस्थायी अस्पताल में किया गया. मृतक की पहचान अलूर के रहने वाले 28 वर्षीय पोताराजू के रूप में हुई है.
लाठी-युद्ध हर वर्ष दशहरा उत्सव के हिस्से के रूप में एक पहाड़ी पर स्थित माला मल्लेश्वर स्वामी मंदिर में आयोजित किया जाता है. हमेशा की तरह, ग्रामीणों ने Police के आदेशों को दरकिनार करते हुए इस आयोजन को किया. उनका कहना है कि यह उनकी परंपरा का हिस्सा है.
इस वार्षिक उत्सव के तहत, अलग-अलग गांवों के लोग दो गुटों में बंट जाते हैं. आधी रात को देवी मल्लम्मा और मल्लेश्वर स्वामी के प्रतीकात्मक विवाह के बाद, दोनों गुट इन देवी-देवताओं की मूर्तियों पर अपना अधिकार जमाने के लिए लाठियों से लड़ते हैं.
दोनों गुटों ने पूरे उत्साह के साथ इस आयोजन में हिस्सा लिया. लड़ाई को रोकने के लिए Police की ओर से किए गए एहतियाती उपाय बेअसर साबित हुए.
नेरानी, नेरानी टांडा और कोथापेटा गांवों के लोग, अरिकेरा, अलूरू, सुलुवई, एलार्थी, निद्रावत्ती और बिलेहाल गांवों के भक्तों के साथ लड़ते हैं. वे एक-दूसरे पर बेरहमी से लाठियां बरसाते हैं, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं. हालांकि, भक्त इन चोटों को शुभ मानते हैं.
प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को इस लड़ाई को आयोजित करने से रोकने की कोशिशें नाकाम रही हैं. हर साल Police इस लड़ाई को रोकने के लिए बल तैनात करती है लेकिन ग्रामीण आदेशों को नहीं मानते और आयोजन कर ही लेते हैं. इस साल 1,000 से अधिक Policeकर्मियों को तैनात किया गया था.
ग्रामीणों का मानना है कि भगवान शिव ने भैरव का रूप धारण किया था और मणि तथा मल्लासुर नाम के दो राक्षसों को लाठियों से पीटा था. ग्रामीण विजयदशमी के दिन इसी घटना को दोहराते हैं. राक्षस पक्ष के ग्रामीणों का एक समूह, ‘देवता पक्ष’ कहलाने वाले विरोधी समूह से मूर्तियां छीनने की कोशिश करता है. वे मूर्तियों पर कब्जा करने के लिए लाठियों से लड़ते हैं.
इस पारंपरिक लड़ाई को देखने के लिए कुरनूल, आसपास के जिलों, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे पड़ोसी राज्यों से हजारों लोग इस गांव में इकट्ठा होते हैं.
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एसडी/पीएम


