ट्रंप के रूसी डीजल सौदे पर रोक के लिए अमेरिकी सांसदों ने पेश किया विधेयक

वाशिंगटन, 29 अक्टूबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से रूसी डीजल के आयात को दी गई छूट को रद्द करने के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन सांसदों ने मिलकर एक विधेयक पेश किया है. सांसदों का कहना है कि यह छूट वर्ष 2022 के उस कानून का उल्लंघन करती है, जिसके तहत रूसी तेल के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया था.
वाशिंगटन राज्य की डेमोक्रेट सांसद मैरी ग्लूसेनकैंप पेरेज और पेंसिल्वेनिया के रिपब्लिकन सांसद ब्रायन फिट्जपैट्रिक तथा नेब्रास्का के रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने पिछले सप्ताह ‘रॉनल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट’ पेश किया. ग्लूसेनकैंप पेरेज के कार्यालय ने Wednesday को इसकी जानकारी दी.
विधेयक का उद्देश्य अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से रूसी तेल के आयात को दी गई छूट को रद्द करना है. इसके पारित होने पर “जनरल लाइसेंस 135 तत्काल प्रभाव से निष्प्रभावी हो जाएगा.” साथ ही, भविष्य में रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात की अनुमति देने वाली ऐसी छूट या सामान्य लाइसेंस जारी करने पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है.
विधेयक में अमेरिकी वित्त मंत्रालय को वर्ष 2022 के रूसी तेल आयात प्रतिबंध कानून का उल्लंघन करने वाले समझौतों पर Governmentी धन खर्च करने से रोकने का प्रावधान भी शामिल है. इसके अलावा, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को यूक्रेन की रक्षा में सहयोग देने और किसी भी व्यवधान की स्थिति में 24 घंटे के भीतर कांग्रेस की खुफिया समितियों को सूचित करने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है.
ग्लूसेनकैंप पेरेज ने कहा, “President का रूसी तेल आयात करने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, कांग्रेस की द्विदलीय सहमति और वर्ष 2022 में पारित कानून की अनदेखी करता है. यदि President वास्तव में ईंधन की कीमतें कम करना चाहते हैं, तो उन्हें ईरान में युद्ध समाप्त करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा रूसी President व्लादिमीर पुतिन तक पहुंचने देना चाहिए.”
फिट्जपैट्रिक ने कहा, “अमेरिका को रूसी तेल की एक बूंद भी आयात नहीं करनी चाहिए. उनके मुताबिक, कांग्रेस ने 2022 में भारी द्विदलीय समर्थन के साथ इस संबंध में फैसला लिया था और कानून अब भी प्रभावी है. प्रशासनिक छूट के जरिए कानून की भावना को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए.”
वहीं, बेकन ने ट्रंप के पुराने रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि President पहले यूरोपीय देशों की रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर आलोचना करते रहे हैं, लेकिन अब उनका प्रशासन रूस के लिए डीजल बेचने की राह आसान बना रहा है.
यह विधेयक मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण बढ़ी ईंधन कीमतों के बीच रूसी डीजल खरीदने के प्रशासन के फैसले के खिलाफ कांग्रेस की ताजा पहल है. रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस भी आशंका जता चुके हैं कि ट्रंप संभवतः वर्ष 2022 के आयात प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहे हैं.
इस मामले का असर भारत-अमेरिका ऊर्जा संबंधों पर भी पड़ सकता है. वॉशिंगटन India पर रूसी कच्चे तेल की खरीद घटाने के लिए दबाव डालता रहा है. वहीं, India ने पश्चिमी देशों की ओर से रूसी ऊर्जा की खरीद को लेकर दोहरे मानदंड अपनाए जाने के सवाल उठाए हैं. रूस से कच्चे तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों पर कड़े शुल्क लगाने से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच यह मुद्दा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में भी अहम बना हुआ है.
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केआर/


