Thursday , 25 February 2021

चीन के जेएफ-17 से कहीं ज्यादा ताकतवर है तेजस

नई दिल्ली (New Delhi) . दुनिया के कई देशों ने तेजस हल्के लड़ाकू विमान एलसीए खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. अगले कुछ वर्षों में एचएएल को पहला निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना है. हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर माधवन ने यह जानकारी दी. माधवन ने यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना को तेजस विमान की आपूर्ति मार्च 2024 से शुरू कर दी जाएगी. कुल 83 विमानों की आपूर्ति न होने तक उसे हर वर्ष करीब 16 विमान सौंपे जाएंगे. एचएएल अध्यक्ष ने कहा कि तेजस मार्क-1ए विमान चीन के जेएफ-17 से ज्यादा उत्कृष्ट है.

इसका इंजन, राडार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सुइट कहीं अधिक बेहतर है. सबसे बड़ा अंतर हवा से हवा में ईंधन भरने का है, जो कि प्रतिद्वंद्वी विमान में मौजूद नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) ने 13 जनवरी को 48 हजार करोड़ रुपये की लागत से एचएएल से 73 तेजस एमके-1ए विमान और दस एलसीए तेजस एमके-1 प्रशिक्षण विमान खरीदने की मंजूरी दी थी, ताकि भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके. माधवन ने कहा कि विमान की मूल लागत 25 हजार करोड़ रुपये है, जबकि 11 हजार करोड़ रुपये का इस्तेमाल हवाईअड्डों पर सहायक उपकरण एवं अन्य ढांचे के विकास में किया जाएगा. वहीं, करीब सात हजार करोड़ रुपये सीमा शुल्क और जीएसटी पर खर्च होगा. एचएएल अध्यक्ष के मुताबिक तेजस के हर लड़ाकू संस्करण की कीमत 309 करोड़ रुपए होगी. वहीं, प्रशिक्षण विमान 280 करोड़ रुपए में मिलेगा.

48 हजार करोड़ की कुल लागत में 2500 करोड़ रुपए डिजाइन और विकास लागत है, जो एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को दिया जाएगा. करीब 2250 करोड़ रुपए विदेशी मुद्रा विनिमय दर के लिए रखा गया है. तेजस एमके-1ए सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक स्कैंड राडार, मिसाइल की दृश्यता सीमा से परे की तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक युद्धक सुइट और हवा से हवा में ईंधन भरने की प्रणाली से लैस होगा. सौदे के लिए एचएएल और भारतीय वायुसेना के बीच पांच फरवरी को एयरो इंडिया प्रदर्शनी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में औपचारिक दस्तखत होने की संभावना है. माधवन ने कहा, ढांचागत विकास और विमान की आपूर्ति के लिए तीन वर्ष की सामरिक समयसीमा है. हम समयसीमा का पालन करेंगे. पहले विमान की आपूर्ति मार्च 2024 में होने की संभावना है.

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