Wednesday , 23 June 2021

उत्तर प्रदेश में कोरोना के खिलाफ जंग, क्या कह रहे हैं आंकड़े और फैक्टर

लखनऊ (Lucknow) . उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में फरवरी 2020 से मार्च 2021 तक 3.26 करोड़ टेस्ट हुए, 771 अस्पतालों के नेटवर्क में 1.75 लाख बिस्तर उपलब्ध रहे, 45 लैब्स में आरटी पीसीआर टेस्ट की सुविधा रही, रिकवरी रेट 98.2 फीसदी रही और अब तक करीब 35 लाख लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है. कामयाबी के पीछे कुछ फैक्टर रहे हैं. टीम-11 पहला फैक्टर रहा. इस टीम ने शुरूआत में ही पूरी योजना तैयार की और सरकार के तमाम विभागों के बीच एक सामंजस्य बनाया ताकि कोरोना महामारी (Epidemic) से कुशलता से निपटा जा सके.

चूंकि 80 फीसदी केस ऐसे थे, जिनमें लक्षण साफ तौर पर सामने नहीं आए इसलिए सर्विलांस के ज़रिये संक्रमितों को पहचानना और उन्हें आइसोलेट करना ही कारगर तरकीब थी. उप्र में 1 लाख से ज़्यादा सर्विलांस कर्मियों ने अब तक 3.12 करोड़ घरों में जाकर करीब 1.86 लाख इलाकों को कवर किया है.

उप्र देश में सबसे ज़्यादा कोरोना टेस्ट करने वाला राज्य बना और 15 मार्च तक यहां 3.2 करोड़ से ज़्यादा टेस्ट किए जा चुके थे. इसके अलावा, उप्र ने संसाधनों को अपने स्तर पर जुटाने और बढ़ाने की तरकीबें अपनाईं. टीबी टेस्टिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया, एमएसएमई यूनिटों और शुगर मिलों में पीपीई किट्स, थर्मामीटरों और सैनिटाइज़रों की मैनुफैक्चरिंग की गई. प्लाज़मा थैरेपी के लिए भी उप्र ने निजी स्तर पर कुशलता से काम किया. जब केस बढ़ने के दौरान चुनौतियां पेश आईं तब उप्र प्रशासन ने तकनीक को टूल की तरह इस्तेमाल किया. जीपीएस के ज़रिये मरीज़ों को ट्रैक करना हो या कॉल रिकॉर्ड्स से संक्रमितों के कॉंटैक्ट्स को ट्रैस करना, उप्र ने तत्परता दिखाई.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कॉर्डिनेशन किया गया, ई-संजीवनी सेवा से गैर कोरोना संक्रमित मरीज़ों को अटैंड किया गया तो एसजीपीजीआई के एक्सपर्टों से टेलिफोन के ज़रिये तनावग्रस्त लोगों की मदद की. उप्र के हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर सवाल और दुविधाएं बनी हुई थीं, ऐसे में राज्य को ज़ाहिर तौर पर बाहरी मदद की ज़रूरत थी. टाटा ट्रस्ट और एचसीएल जैसे कॉर्पोरेट्स ने न केवल मुख्यमंत्री (Chief Minister) कोविड केयर फंड में दान दिया बल्कि सामजिक संस्थाओं और वॉलेंटियरों ने सेवाएं दीं तो यूनिसेफ जैसी संस्थाओं ने राज्य को तकनीकी मदद भी दी. इसके साथ ही, लॉकडाउन (Lockdown) जैसे सख्त कदमों के दौरान प्रभाव वाले सेलिब्रिटियों ने भी जागरूकता के लिए योगदान दिया.

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