
Mumbai , 22 अप्रैल . फिल्मी दुनिया की चमक-दमक के बीच कई कलाकार ऐसे होते हैं, जो सफलता मिलने के बाद भी अंदर से खालीपन महसूस करते हैं और खुद को तलाशने की कोशिश में अलग रास्ता चुनते हैं. याना गुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही. यूरोप और जापान में मॉडलिंग की दुनिया में नाम कमाने के बाद जब लगातार काम और भागदौड़ से उनका मन थक गया, तब वह शांति और सुकून के लिए India के पुणे स्थित ओशो आश्रम आ गईं. शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अध्यात्म की खोज में India आई याना आगे चलकर Bollywood की सबसे चर्चित आइटम गर्ल्स में से एक बन गईं.
याना गुप्ता का जन्म 23 अप्रैल 1979 को चेकोस्लोवाकिया के ब्रनो शहर में हुआ था, जो आज चेक रिपब्लिक का हिस्सा है. उनका असली नाम जाना सिंकोवा था. बचपन से ही उनकी जिंदगी आसान नहीं रही. जब वे छोटी थीं, तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे. इसके बाद उनकी मां ने अकेले ही याना और उनकी बहन की परवरिश की. परिवार आर्थिक रूप से परेशानियों का सामना कर रहा था, इसलिए याना ने बचपन से ही संघर्ष देखा.
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गार्डनिंग और पार्क आर्किटेक्चर की पढ़ाई शुरू की. इसी दौरान उनकी एक दोस्त मॉडलिंग कोर्स करने जा रही थी और उसने याना को भी साथ चलने के लिए कहा. यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. याना ने मॉडलिंग सीखी और बहुत जल्द इस दुनिया में पहचान बना ली. कम उम्र में ही वे प्रोफेशनल मॉडल बन गईं और यूरोप के कई देशों के साथ-साथ जापान में भी काम करने लगीं.
लेकिन, लगातार काम और ग्लैमर की दुनिया की भागदौड़ से वे धीरे-धीरे परेशान होने लगीं. उन्हें लगने लगा कि जिंदगी में सिर्फ काम और शोहरत ही सब कुछ नहीं है. वे मानसिक शांति चाहती थीं. इसी दौरान उन्हें India के पुणे में मौजूद ओशो आश्रम के बारे में पता चला. उन्होंने सब कुछ छोड़कर India आने का फैसला किया. यहां वे अध्यात्म और खुद को समझने की कोशिश करने लगीं.
ओशो आश्रम में ही उनकी मुलाकात कलाकार सत्यकाम गुप्ता से हुई. दोनों करीब आए और साल 2001 में शादी कर ली. शादी के बाद उन्होंने अपने नाम के साथ ‘गुप्ता’ जोड़ लिया और India को ही अपना घर बना लिया. इसी दौरान उन्होंने India में मॉडलिंग की शुरुआत की. शुरुआत में उन्हें यहां कोई नहीं जानता था, इसलिए उन्होंने खुद मेहनत करके काम ढूंढना शुरू किया. मशहूर फोटोग्राफर डब्बू रत्नानी के साथ काम करने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई. धीरे-धीरे वे बड़े विज्ञापनों और फैशन शो का हिस्सा बनने लगीं.
फिर साल 2003 में उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ आया. उन्हें फिल्म ‘दम’ में ‘बाबूजी जरा धीरे चलो’ गाने पर परफॉर्म करने का मौका मिला. इस गाने ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया. लोग फिल्म से ज्यादा याना को याद रखने लगे. इसके बाद उन्हें Bollywood और साउथ फिल्मों में कई आइटम नंबर मिलने लगे. वे ‘अन्नियन’ जैसी फिल्मों में भी नजर आईं.
हालांकि, सफलता के साथ एक मुश्किल भी आई. फिल्म इंडस्ट्री उन्हें सिर्फ ग्लैमरस और आइटम नंबर वाले रोल देने लगी. याना चाहती थीं कि वे गंभीर किरदार निभाएं, लेकिन उन्हें वैसा मौका कम मिला. धीरे-धीरे उनकी पहचान सिर्फ एक ‘आइटम गर्ल’ बनकर रह गई. इसके बावजूद, उन्होंने कई फिल्मों और टीवी शोज में काम किया. वे ‘झलक दिखला जा’ और ‘फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी’ जैसे शो का हिस्सा भी रहीं.
उन्होंने साल 2009 में हेल्थ और फिटनेस पर एक किताब भी लिखी. इस किताब में उन्होंने अपने खानपान से जुड़ी दिक्कतों और निजी संघर्षों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि लंबे समय तक वे अपने शरीर और आत्मविश्वास को लेकर परेशान रहीं. उनकी आखिरी फिल्म साल 2018 में आई ‘दशहरा’ थी, जिसमें उन्होंने ‘जोगनिया’ गाना किया था.
इसके बाद याना गुप्ता धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया से दूर हो गईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब वे योग, मेडिटेशन और आध्यात्मिक जीवन पर ध्यान दे रही हैं.
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पीके/एबीएम