Friday , 22 January 2021

किसान आंदोलन में कूदा पाक, मंत्री फवाद चौधरी ने कहा किसानों पर हो रहा अत्याचार, भारत में खतरे में अल्पसंख्यक

चंडीगढ़ (Chandigarh) . पंजाब (Punjab) से उठे किसान आंदोलन में अब पाकिस्तान भी कूद पड़ा है. पाकिस्तान के मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने ट्वीट किया है कि भारत में किसानों पर अत्याचार किया जा रहा है. भारत में अल्पसंख्यक समुदाय खतरे में है. फवाद चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के हैशटैग के साथ में एंडिया लिखा है. चौधरी का यह ट्वीट भारत में किसानों के आंदोलन को उग्र करने के नजरिए से देखा जा रहा है.
इससे पहले चौधरी दिल्ली में चल रहे आंदोलन पर भी भारत विरोधी तेवर दिखाते हुए आग में घी डालने का काम करते रहे हैं. इस बार भी ज्यों-ज्यों आंदोलन उग्र हो रहा है, पाकिस्तान समर्थित ट्विटर हैंडल्स से उग्र शब्दवाली इस्तेमाल की जा रही है. इसी कड़ी में एक अन्य वैरीफाइड ट्विटर अकाउंट के जरिए किसान आंदोलन को केंद्र बनाकर खालिस्तान की आवाज बुलंद की है. इससे पहले पंजाब (Punjab) में भी किसान आंदोलन के दौरान सिंघू बॉर्डर पर खालिस्तान के नारे बुलंद किए गए थे.

किसान आंदोलन के दौरान भिंड (Bhind)रावाले के समर्थन में लगे नारे
किसानों के दिल्ली कूच के दौरान इक्का-दुक्का जगहों पर खालिस्तान और भिंड (Bhind)रांवाले के समर्थन में नारेबाजी की गई. माना जा रहा है कि किसान आंदोलन की आड़ में पाकिस्तान व खालिस्तानी लहर समर्थित संगठन अपनी रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं. आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए रचे जा रहे षड्यंत्र की बात को इसलिए भी बल मिल रहा है, क्योंकि किसान आंदोलन में ही एक जगह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को सीधे चेतावनी देकर उनका हश्र भी इंदिरा गांधी जैसा करने की धमकी दी गई है.

चौकन्नी हुई सुरक्षा एजेंसियां
कृषि कानूनों को काले बिल करार देकर उन्हें वापस लेने के लिए दबाव बना रहे किसानों के संघर्ष में खालिस्तान के हक नारे लगने से सुरक्षा एजेंसियां तो सतर्क हो ही गई हैं, किसान आंदोलन के बड़े नेताओं को भी अपनी मुहिम किसी और रास्ते पर जाती नजर आने लगी है. दरअसल 30 से ज्यादा यूनियनों के बैनर तले दिल्ली में किसानों का इतना बड़ा जमावड़ा हो गया है कि इन्हें संभालना किसान नेताओं के लिए ही मुश्किल हो गया है.

खास बात यह भी है कि इस आंदोलन में किसानों के अलावा और भी कई लोग कूद गए हैं. कई छात्र (student) यूनियनों के कार्यकर्ताओं के अलावा कई गर्मख्याली भी किसान का साथ देने के नाम पर दिल्ली में डट गए हैं. ऐसे में अब किसान यूनियनों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. उन्हें अपने वर्करों से अलग इन लोगों को प्लेटफार्म देना चाहिए ताकि वह उनके नाम का प्रयोग न कर सकें और उनकी पहचान भी अलग रहे.

किसान खालिस्तानी आतंकी नहीं : सुखबीर बादल
शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर बादल ने कहा कि क्या किसान खालिस्तानी दिखते हैं. ये पंजाब (Punjab) के किसान हैं, जिन्होंने सारी जिंदगी देश की सेवा की है. देश के प्रति वफादार हैं, देश को अन्न देते रहे हैं. किसानों को खालिस्तानी न कहो. ये देश के वे लोग हैं, जिन्होंने देश को बचाने के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर दिया है. कैप्टन अमरिंदर सिंह की पॉलिसी बड़ी खतरनाक है. मुख्यमंत्री (Chief Minister) के तौर पर यह उनकी जिम्मेदारी है कि किसानों के लिए लड़ते, लेकिन यह खुद पीछे हट गए हैं जबकि किसान सड़कों पर हैं. किसान आंदोलन कैप्टन अमरिंदर सिंह को लीड करना चाहिए, वह अपने महल में क्यों बैठे हैं.

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