यमन के पूर्व राष्ट्रपति हादी ने सऊदी अरब में ली अंतिम सांस, 80 साल की उम्र में हुआ निधन

अदन, 28 मई . यमन के पूर्व President अब्द-रब्बू मंसूर हादी का Thursday को 80 साल की उम्र में निधन हो गया. हादी की अध्यक्षता यमन के लंबे सिविल वॉर और नाजुक Political बदलाव से जुड़ी थी. यह जानकारी यमन के Governmentी टेलीविजन और उनके परिवार के एक करीबी सोर्स ने दी.

सऊदी अरब से चलने वाले यमन के Governmentी ब्रॉडकास्टर, यमन टीवी ने बताया कि हादी की रियाद में मौत हो गई.

एक परिवार के सोर्स ने न्यूज एजेंसी सिन्हुआ को पुष्टि की है, “हाल के दिनों में अचानक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या होने के बाद आज सुबह रियाद के एक हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई.”

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि हादी ने देश के सबसे मुश्किल समय में से एक के दौरान यमन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने President के तौर पर काम किया.

पूर्व President हादी का जन्म 1 सितंबर, 1945 को दक्षिणी प्रांत अबयान में हुआ. वह सैन्य और Political रैंक में आगे बढ़े और अक्टूबर 1994 में उपPresident बने.

हादी ने फरवरी 2012 में President पद संभाला था. यह गल्फ सपोर्टेड ट्रांजिशन प्लान का हिस्सा था. यह प्लान तब बनाया गया था जब लंबे समय से President रहे अली अब्दुल्ला सालेह ने तथाकथित ‘अरब स्प्रिंग’ के दौरान देश भर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दे दिया था.

बता दें कि अरब स्प्रिंग मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देशों के बीच शुरू हुए लोकतंत्र-समर्थक और Government-विरोधी विरोध प्रदर्शनों, विद्रोहों और सशस्त्र क्रांतियों की एक विशाल लहर थी. इस क्रांतिकारी लहर की शुरुआत साल 2010 के अंत में हुई थी. इसने क्षेत्र के कई दशकों पुराने सत्तावादी शासनों को चुनौती दी और उसे उखाड़ फेंका.

ऑफिस संभालने के बाद मंसूर हादी ने यमन के सैन्य और सुरक्षा संस्थानों के ढ़ांचों में सबसे बड़ा बदलाव शुरू किया, जिसमें दुश्मन हथियारबंद समूहों को एक करने और सेना और सुरक्षा इकाई को फिर से संगठित करने की कोशिश की गई.

हालांकि, यमन का Political परिवर्तन तब बिगड़ गया जब हूती फोर्स दक्षिण की ओर बढ़ीं और सना में जरूरी Governmentी संस्थानों पर कब्जा कर लिया.

जनवरी 2015 में हादी ने अपना इस्तीफा दे दिया जब हूती फाइटर्स ने प्रेसिडेंशियल पैलेस को घेर लिया और उन्हें कैपिटल में हाउस अरेस्ट कर लिया.

अगले महीने वह दक्षिणी पोर्ट सिटी अदन भाग गए, अपना इस्तीफा वापस ले लिया, और विदेशी दखल की मांग की. 26 मार्च 2015 को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हादी के कहने पर हूतियों के खिलाफ सैन्य दखल दिया, जिससे एक भयानक लड़ाई शुरू हो गई और यह दुनिया के सबसे बुरे मानवीय संकटों में से एक बन गया.

अप्रैल 2022 में हादी ने अपनी पावर आठ सदस्यों वाली President नेतृत्व परिषद को ट्रांसफर कर दी, जिसका मकसद हूती विरोधी गुटों को एकजुट करना और लड़ाई के Political समाधान की कोशिशों को फिर से शुरू करना था.

यमन कई सालों से हूती विद्रोहियों और अदन में मौजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त Government के बीच बंटा हुआ है. हूती सना और उत्तरी यमन के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा किया है.

केके/डीकेपी

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