एसआईआर का विरोध नहीं, साजिश और राजनीतिक दुरुपयोग के खिलाफ विपक्ष: आनंद दुबे

Mumbai , 28 मई . शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष को एसआईआर प्रक्रिया से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसका इस्तेमाल Political बदले की भावना से नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि चुनाव आयोग को पूरी पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए ताकि किसी भी असली मतदाता के साथ अन्याय न हो.

आनंद दुबे ने कहा कि विपक्ष कभी भी एसआईआर के खिलाफ नहीं रहा. वोटर लिस्ट की जांच और संशोधन होना जरूरी है क्योंकि हर चुनाव में नए मतदाता जुड़ते हैं और कई बदलाव होते हैं, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर इस प्रक्रिया का इस्तेमाल गलत तरीके से किया गया. उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे, जिसके बाद अदालत को दखल देना पड़ा और बाद में नाम फिर से जोड़े गए.

उन्होंने कहा कि अदालतों ने भी साफ कहा कि चुनाव के नाम पर किसी नागरिक के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. चुनाव आयोग को यह अधिकार जरूर है कि वह तय करे कि कौन वोटर है और कौन नहीं, लेकिन यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए. अगर कोई भारतीय नागरिक वोट देने के अधिकार से वंचित हो जाता है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और Maharashtra जैसे राज्यों में भी एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है और विपक्ष सिर्फ यही चाहता है कि इसके जरिए किसी खास वर्ग या Political विचारधारा को निशाना न बनाया जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि अगर चुनाव आयोग किसी Political दबाव में काम करेगा तो उसे अदालत की फटकार का सामना करना पड़ेगा.

आनंद दुबे ने यह भी कहा कि अगर कोई गैर-नागरिक अवैध तरीके से वोट डाल रहा है तो उस पर कार्रवाई जरूर होनी चाहिए. उन्होंने माना कि घुसपैठ और फर्जी वोटिंग रोकना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर असली भारतीय नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए. चुनाव निष्पक्ष हों और हर असली मतदाता को उसका अधिकार मिले, यही विपक्ष की मुख्य मांग है.

बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र Government और भाजपा पर भी निशाना साधा. उनका कहना है कि जहां-जहां गैर-भाजपाई Governmentें हैं, वहां ईडी और सीबीआई की कार्रवाई ज्यादा देखने को मिलती है. उन्होंने कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ हुई जांच एजेंसियों की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे Political विरोधियों को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि चाहे पश्चिम बंगाल की Chief Minister ममता बनर्जी हों, Jharkhand के नेता हेमंत सोरेन हों या अन्य विपक्षी नेता, सभी कानूनी तरीके से अपनी लड़ाई लड़ेंगे. दुबे ने कहा कि विपक्ष डरने वाला नहीं है और अगर किसी पर गलत कार्रवाई होगी तो उसका जवाब अदालत और कानून के जरिए दिया जाएगा.

इसके साथ ही उन्होंने हिंसा का विरोध भी किया. उनका कहना है कि अगर किसी एजेंसी की रेड होती है तो उसका जवाब कानूनी तरीके से दिया जाना चाहिए, न कि हिंसा या उपद्रव के जरिए. उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और किसी Political दल के आधार पर अलग-अलग रवैया नहीं अपनाया जाना चाहिए.

आनंद दुबे ने पश्चिम बंगाल में भाजपा Government बनने और ‘डबल इंजन’ Government की चर्चा पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की Government है और वह लगातार घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है तो अब उसे कार्रवाई करके दिखाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर Government के पास बीएसएफ और बाकी एजेंसियां हैं तो अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें कानून के मुताबिक बाहर भेजने की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए.

पीआईएम/डीकेपी

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