
New Delhi, 30 अप्रैल . Enforcement Directorate (ईडी) ने Thursday को आईजोल की एक विशेष अदालत में जाकिर हुसैन और 13 अन्य लोगों के खिलाफ कथित धोखाधड़ी वाले वाहन ऋण घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अभियोग दायर किया. यह मामला पीएमएलए, 2002 की धारा 3 के तहत आता है और धारा 4 के तहत दंडनीय है.
ईडी ने मिजोरम Police द्वारा पहले दर्ज की गई दो First Information Report के आधार पर जांच शुरू की. 29 मार्च 2024 को महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (एमएमएफएसएल) के बिजनेस हेड की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों के लिए आइजोल स्थित सी एंड ईओ Police स्टेशन में First Information Report दर्ज की गई.
20 मार्च 2024 को एमएमएफएसएल के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता की शिकायत पर इसी तरह के अपराधों के लिए आइजोल Police स्टेशन में एक और First Information Report दर्ज की गई. इसके बाद मिजोरम Police ने सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए.
पीएमएलए के तहत की गई जांच में पता चला कि जाकिर हुसैन, एमएमएफएसएल की आइजोल शाखा में एरिया बिजनेस मैनेजर के रूप में कार्यरत रहते हुए एक बड़े पैमाने पर संगठित धोखाधड़ी का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड था.
कार डीलरों, एमएमएफएसएल कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के साथ आपराधिक साजिश रचते हुए उसने आधार कार्ड, वोटर आईडी और आय प्रमाण पत्र जैसे जाली और मनगढ़ंत केवाईसी दस्तावेजों का उपयोग करके सैकड़ों फर्जी ग्राहक प्रोफाइल बनाए और बिना किसी वास्तविक वाहन की बिक्री के फर्जी तरीके से गैर-मौजूद ग्राहकों को वाहन ऋण वितरित करवाए.
मुख्य आरोपी द्वारा स्वीकार किए जाने के अनुसार, उसने 600 से अधिक फर्जी ऋण फाइलों का प्रबंधन किया, जबकि सह-आरोपी प्रोलोय दास ने लगभग 1,200 और फाइलें बनाईं.
एमएमएफएसएल द्वारा चार आरोपी कार डीलर मेसर्स सीके कार्स, मेसर्स राफेल निसान (मेसर्स हाइलैंड), मेसर्स एआईडीयू मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स नेशनल बिजनेस एंटरप्राइजेज को इन फर्जी खातों के माध्यम से वितरित की गई कुल ऋण राशि लगभग 146.67 करोड़ रुपए थी.
अपराध की कमाई को छिपाने और उसमें हेराफेरी करने के लिए जाकिर हुसैन ने आरोपी एच. लालथंकिमा और एडेंथारा के साथ मिलकर एमएमएफएसएल से मिलते-जुलते नामों से फर्जी बैंक खाते बनाए, जैसे महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड, महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, मिजोरम रूरल बैंक.
ईडी के अनुसार, ऋण की राशि पहले आरोपी कार डीलरों के बैंक खातों में जमा की गई, जिन्होंने जाकिर हुसैन के मौखिक निर्देशों पर उन धनराशि का एक बड़ा हिस्सा इन फर्जी खातों में स्थानांतरित कर दिया. इन दो फर्जी खातों में कुल लगभग 87.13 करोड़ रुपए जमा किए गए, जिसमें से 75.34 करोड़ रुपए सीधे आरोपी कार डीलरों द्वारा जमा किए गए.
फर्जी ऋण फाइलों का टेली-सत्यापन फर्जी पहचान पर प्राप्त अस्थायी सिम कार्डों का उपयोग करके किया गया, जिन्हें बाद में सबूत मिटाने के लिए नष्ट कर दिया गया. जांच से पता चला कि एमएमएफएसएल के कर्मचारियों, सहयोगियों, रिश्तेदारों और फर्जी संस्थाओं के नाम पर कई बैंक खातों का इस्तेमाल करके एक जटिल जाल बिछाया गया था.
फर्जी खातों से धनराशि को आगे विभिन्न व्यक्तियों को हस्तांतरित किया गया, जिन्होंने बाद में नकदी निकाली या उसे अन्य व्यक्तियों को स्थानांतरित कर दिया. अपराध की आय का एक हिस्सा जानबूझकर एमएमएफएसएल को ईएमआई भुगतान के रूप में वापस भेजा गया, जिसकी राशि लगभग 71.34 करोड़ रुपए थी, ताकि फर्जी ऋण खातों को असली दिखाया जा सके और धोखाधड़ी को लंबे समय तक जारी रखा जा सके.
अपराध से अर्जित और गबन की गई कुल धनराशि लगभग 75.33 करोड़ रुपए है. इस धनराशि को अंततः चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया. आरोपी जाकिर हुसैन ने गबन की गई धनराशि का उपयोग ऐजोल (मिजोरम), तेजपुर, नागांव, सिलचर और बालिपारा (असम) में अचल संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए किया – जो बेनामी व्यवस्था के तहत उसकी पत्नी, भाई, बहनोई और अन्य सहयोगियों के नाम पर थीं – साथ ही लगभग 2.06 करोड़ रुपये की जीवन बीमा पॉलिसियों में निवेश करने और तीसरे पक्ष के नाम पर खरीदी गई महंगी गाड़ियों में निवेश करने के लिए भी किया.
धन की वास्तविक प्रकृति और स्रोत को छिपाने के लिए पंजीकृत विक्रय विलेखों में लेनदेन मूल्यों को जानबूझकर कम करके दिखाया गया था. Government द्वारा अनुमोदित मूल्यांकनकर्ताओं ने कई संपत्तियों का मूल्यांकन घोषित मूल्य से काफी अधिक किया, जिससे लेनदेन मूल्यों को जानबूझकर छिपाने की बात साबित होती है.
जांच के दौरान, 12 फरवरी, 2025 को पीएमएलए, 2002 की धारा 17(1) के तहत नौ परिसरों पर तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए. ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5 के तहत तीन अस्थायी कुर्की आदेशों के माध्यम से लगभग 35.62 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है.
कुर्काई की गई संपत्तियों में मिजोरम और असम में स्थित अचल संपत्तियां, विभिन्न खातों में जमा राशि, बीमा पॉलिसियां और दो वाहन (किआ सेल्टोस और हुंडई अल्काज़ार) शामिल हैं.
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ओपी/डीकेपी