आईडीबीआई बैंक धोखाधड़ी मामले में ईडी ने उठाया बड़ा कदम

New Delhi, 30 अप्रैल . Enforcement Directorate (ईडी) के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ओटिस एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक सुरेश कुमार काशलीवाल के खिलाफ विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दायर की है.

यह शिकायत धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायालय, कामरूप (मेट्रो), गुवाहाटी में दाखिल की गई है. ईडी के अनुसार, आरोपियों पर धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) का अपराध बनता है, जो पीएमएलए की धारा 3 के तहत परिभाषित और धारा 4 व 70 के तहत दंडनीय है.

ईडी ने यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), एसीबी गुवाहाटी द्वारा दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू की थी. सीबीआई ने इस मामले में सुरेश कुमार काशलीवाल, निर्मला देवी काशलीवाल और कंपनी के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया है.

जांच में सामने आया कि कंपनी ने अपने निदेशक के माध्यम से दिसंबर 2009 में आईडीबीआई बैंक, गुवाहाटी से 3 करोड़ रुपए का ऋण धोखाधड़ी से हासिल किया. इसके लिए जिन संपत्तियों को गिरवी दिखाया गया, वे पहले ही तीसरे पक्ष को बेची जा चुकी थीं. साथ ही, गारंटरों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक दस्तावेज तैयार किए गए और मृत व्यक्ति की जानकारी भी बैंक से छिपाई गई.

ईडी के मुताबिक, आरोपियों ने ऋण की राशि को कंपनी के खातों में ट्रांसफर कर विभिन्न भुगतान के जरिए उसे नियमित व्यावसायिक लेन-देन के साथ मिला दिया, ताकि अवैध धन को वैध दिखाया जा सके. बाद में यह खाता 30 दिसंबर 2013 को एनपीए घोषित हुआ. जून 2019 में बैंक ने इसे धोखाधड़ी घोषित कर भारतीय रिजर्व बैंक को सूचित किया. बैंक ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कर लगभग 8.62 करोड़ रुपए के नुकसान की जानकारी दी.

हालांकि, आरोपी ने 2024 में वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) के जरिए 3.10 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया, लेकिन ईडी का कहना है कि मनी लॉन्ड्रिंग एक सतत अपराध है और यह अपराध धन प्राप्त करने और उसके उपयोग के साथ ही शुरू हो जाता है.

ओपी/डीकेपी

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