एफसीआरए संशोधनों के खिलाफ केरल विधानसभा में पास हुआ प्रस्ताव, भाजपा ने किया विरोध

तिरुवनंतपुरम, 1 जुलाई . केरल विधानसभा ने Wednesday को एक विशेष प्रस्ताव पारित कर केंद्र Government से विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की मांग की. इस प्रस्ताव का केवल भाजपा ने विरोध किया.

यह प्रस्ताव 111 वोटों के समर्थन और दो वोटों के विरोध से पारित हुआ. भाजपा के दो विधायकों ने इसके खिलाफ मतदान किया. उनकी ओर से दिए गए संशोधन प्रस्ताव पहले ही खारिज कर दिए गए थे.

भाजपा विधायक वी. मुरलीधरन ने कहा कि राज्य विधानसभा को संसद द्वारा बनाए गए कानूनों में बदलाव की मांग करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा प्रस्ताव संघीय व्यवस्था (फेडरल सिस्टम) के सिद्धांतों के खिलाफ है.

हालांकि, विधानसभा ने उनके संशोधन प्रस्तावों को खारिज कर दिया और मूल प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित कर दिया.

प्रस्ताव पेश करते हुए Chief Minister वीडी सतीशन ने आरोप लगाया कि केंद्र Government के प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य सामाजिक संगठनों को केंद्र के अधिक नियंत्रण में लाना है, जिससे उनकी स्वतंत्रता प्रभावित होगी.

उन्होंने कहा कि इन बदलावों का असर उन संस्थाओं पर पड़ेगा जो जनकल्याण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, दिव्यांगों के पुनर्वास, आपदा राहत और अन्य मानवीय कार्यों में लगी हैं. खासकर केरल में ये संस्थाएं Government के साथ मिलकर लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

प्रस्ताव में कहा गया है कि नए नियमों के तहत संस्थाओं की गतिविधियों को केवल 105 तय क्षेत्रों तक सीमित कर दिया गया है. इसके अलावा, अपने पंजीकरण वाले राज्य के बाहर काम करने के लिए नया पंजीकरण जरूरी होगा. विदेशी फंड की अगली किस्त तभी मिलेगी जब पहले मिले फंड के उपयोग की जांच पूरी होगी, जिससे परियोजनाओं में देरी हो सकती है. साथ ही, छोटी तकनीकी गलतियों पर भी विदेशी फंड का 30 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है.

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि पदाधिकारियों के व्यक्तिगत social media अकाउंट और प्रकाशित लेखों की जानकारी देना अनिवार्य करना उनकी निजता का उल्लंघन है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ है.

इसके अलावा, मुख्य पदाधिकारी की परिभाषा बढ़ाकर ट्रस्टी, साझेदार और निदेशकों को भी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की व्यवस्था की गई है. विधानसभा का कहना है कि इससे प्रतिष्ठित और अनुभवी लोग सामाजिक संस्थाओं से जुड़ने से बचेंगे.

विधानसभा ने उन प्रावधानों पर भी चिंता जताई जिनके तहत यदि किसी संस्था का एफसीआरए पंजीकरण रद्द, निलंबित या नवीनीकृत नहीं होता, तो Government द्वारा नामित अधिकारी उस संस्था की विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उन्हें बेच भी सकता है.

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ‘धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करना’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने के कारण इसका गलत इस्तेमाल आदिवासी और अन्य कमजोर वर्गों के बीच काम करने वाले संगठनों के खिलाफ किया जा सकता है.

विधानसभा ने कहा कि प्रस्तावित कानून और नियम संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और संघीय व्यवस्था को कमजोर करते हैं. इसलिए उसने केंद्र Government से इन सभी प्रस्तावित संशोधनों को पूरी तरह वापस लेने की अपील की.

–

एएमटी/पीएम

Leave a Comment