
New Delhi, 25 सितंबर . ‘मेक इन इंडिया’ के 12 साल India की आर्थिक और औद्योगिक यात्रा में बड़े बदलाव का दौर रहे हैं. यह बात Friday को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि India में निर्माण की शुरुआत का यह अभियान आज ऐसे मजबूत औद्योगिक तंत्र में बदल चुका है, जो घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है, निवेश आकर्षित कर रहा है, नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है और रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है. साथ ही भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में India की विनिर्माण नीति ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है. इसका असर खास तौर पर रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में दिखाई दे रहा है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि India की रक्षा व्यवस्था वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी लगातार मजबूत की जा रही है. उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर India की ताकत देखनी हो तो आसमान, समुद्र और जमीन तीनों जगह इसकी झलक दिखाई देती है.
इससे पहले उन्होंने Thursday रात एक कार्यक्रम में कहा कि आसमान में भारतीय पायलट तेजस लड़ाकू विमान और प्रचंड हेलिकॉप्टर के साथ देश की क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं. समुद्र में India का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर रहा है. वहीं जमीन पर भारतीय सेना अर्जुन टैंक और India में निर्मित लंबी दूरी की तोप धनुष के साथ देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है.
रक्षा मंत्री ने India की बढ़ती तकनीकी क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म इसका उदाहरण हैं. उन्होंने India में निर्मित एशिया की सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर फैक्ट्री का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि India पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और छठी पीढ़ी के लड़ाकू जेट बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए गए हैं. Government ने केवल बड़े रक्षा निर्माताओं पर निर्भर रहने के बजाय स्टार्ट-अप और एमएसएमई को भी रक्षा नवाचार से जोड़ा है.
उन्होंने कहा कि Government घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी काम कर रही है. इसके लिए सृजन रक्षा उपकरण सशक्तिकरण मंच के माध्यम से देश के रक्षा निर्माताओं, एमएसएमई और विक्रेताओं को एक साथ जोड़ा जा रहा है. राजनाथ सिंह के मुताबिक, इस मंच पर अब तक 41,000 से अधिक विक्रेता और 2.7 लाख से अधिक उत्पाद सूचीबद्ध किए जा चुके हैं. यह कदम देश में रक्षा उत्पादन से जुड़ी घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है.
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जीसीबी/एसके