बीएस-6 वाहनों पर प्रतिबंध के बहाने विपक्ष की रैली रोकने की साजिश: कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद

New Delhi, 28 अक्टूबर . कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए 1 नवंबर से बीएस-6 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर Government पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिबंध लागू करने की तारीख और समय के पीछे कांग्रेस और विपक्षी दलों की प्रस्तावित रैली में लोगों की भागीदारी प्रभावित करने का मकसद हो सकता है. शमा ने दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्र और संबंधित राज्यों की Governmentों से संयुक्त रूप से कदम उठाने की मांग की. साथ ही, उन्होंने भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’, व्यापारियों की चिंताओं और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट सत्र पर भी प्रतिक्रिया दी.
बीएस-6 वाहनों पर प्रतिबंध के मुद्दे पर शमा मोहम्मद ने कहा कि केवल कुछ वाहनों की आवाजाही रोकने से दिल्ली में प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. प्रतिबंध के कुछ दिनों बाद वही वाहन फिर सड़कों पर दिखाई देने लगेंगे. प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए Government को व्यापक योजना बनानी होगी. केंद्र के साथ-साथ Haryana, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की Governmentों को भी इस मुद्दे पर गंभीरता से काम करना चाहिए. उन्होंने Prime Minister Narendra Modi से संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर युद्धस्तर पर कार्रवाई करने की मांग की. शमा ने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण, टूटी सड़कों और फुटपाथों से उठने वाली धूल को भी समस्या का हिस्सा बताया. उन्होंने सड़कों और फुटपाथों की मरम्मत, निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण तथा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया.
प्रतिबंध की तारीख और समय को लेकर सवाल उठाते हुए शमा मोहम्मद ने कहा कि दिल्ली में अक्टूबर से ही प्रदूषण की समस्या महसूस होने लगती है. उन्होंने सवाल किया कि प्रतिबंध 1 नवंबर से ही क्यों लागू किया जा रहा है और इसे रात 12 बजे से शुरू करने का फैसला क्यों लिया गया. उन्होंने कहा कि 1 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कांग्रेस और विपक्षी दलों की रैली प्रस्तावित है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी आवाज उठाई जानी है. शमा ने आशंका जताई कि वाहनों पर प्रतिबंध का फैसला रैली में लोगों की भागीदारी को प्रभावित करने के उद्देश्य से लिया गया हो सकता है.
भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने कार्यक्रम आयोजित करती है, लेकिन विपक्ष के कार्यक्रमों के समय व्यापारियों की परेशानियों का मुद्दा उठाया जाता है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी Political दलों को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए. शमा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं और इससे भाजपा को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई है. उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामले और फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर न्यायपालिका और चुनाव आयोग के बीच उठे सवालों का भी जिक्र किया. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए शमा ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगी.
व्यापारियों की ओर से राहुल गांधी से मुलाकात के लिए 20 मिनट का समय मांगे जाने के सवाल पर शमा मोहम्मद ने कहा कि व्यापारियों को भाजपा के कार्यक्रमों के दौरान होने वाली यातायात संबंधी परेशानियों पर भी सवाल उठाने चाहिए. उन्होंने पूछा कि यदि कांग्रेस की रैली से कारोबार प्रभावित होने की आशंका है, तो अन्य Political कार्यक्रमों के दौरान भी इसी तरह की चिंता क्यों नहीं जताई जाती. उन्होंने चांदनी चौक में होने वाले कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापारियों की समस्याओं को लेकर सभी Political दलों के कार्यक्रमों पर समान रूप से सवाल होना चाहिए. शमा ने कहा कि कांग्रेस व्यापारियों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं कर रही, लेकिन इस मुद्दे को केवल विपक्ष की रैली से जोड़ना उचित नहीं है.
मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रस्तावित मॉक पार्लियामेंट सत्र को लेकर शमा मोहम्मद ने कहा कि कांग्रेस ने दिल्ली Police से अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं दी गई. इसके बाद पार्टी ने खड़गे के आवास पर सत्र आयोजित करने की बात कही. उन्होंने सवाल उठाया कि जब विपक्ष के नेता लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा करना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसा करने से क्यों रोका जाना चाहिए. कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेगी. उन्होंने राहुल गांधी की मांग का हवाला देते हुए कहा कि यदि Government चाहती है कि 1 नवंबर की रैली न हो, तो ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए. कांग्रेस चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग करती रहेगी.
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पीएसके


