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Saturday, 7 November 2026
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न्यूजीलैंड चुनाव में नेशनल और लेबर के बीच कांटे की टक्कर, छोटे दलों की भूमिका अहम

न्यूजीलैंड चुनाव में नेशनल और लेबर के बीच कांटे की टक्कर, छोटे दलों की भूमिका अहम

वेलिंगटन, 7 नवंबर . न्यूजीलैंड के आम चुनाव की वोटिंग (7 नवंबर) संपन्न होने के कुछ देर बाद ही काउंटिंग शुरू हो गई. शुरुआती नतीजों में सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी को 29.4 फीसदी और मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी को 29.9 फीसदी मत मिले. इस तरह दोनों के बीच मुकाबला बेहद करीबी हो गया है. लगभग 35 फीसदी काउंटिंग होने के बाद ये स्पष्ट किया गया.

Saturday को जारी शुरुआती मतगणना में दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर लगातार बदलता दिखाई दिया. शुरुआती रुझानों में नेशनल पार्टी आगे रही, जबकि मतगणना के दौरान लेबर पार्टी ने भी उसे कड़ी चुनौती दी. किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत मिलने के संकेत नहीं हैं, और ऐसे में Government गठन में छोटे दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है.

न्यूजीलैंड में आम चुनाव के लिए 7 नवंबर को मतदान हुआ. हालांकि, अग्रिम मतदान की प्रक्रिया 26 अक्टूबर से ही शुरू हो गई थी. चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान केंद्र स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक खुले रहे. चुनाव से पहले ही दोनों प्रमुख दलों के बीच कड़ा मुकाबला होने के अनुमान लगाए जा रहे थे.

न्यूजीलैंड के चुनाव आयोग की शुरुआती मतगणना में नेशनल पार्टी को 29.4 प्रतिशत और लेबर पार्टी को 29.9 प्रतिशत वोट मिले. ग्रीन पार्टी 14.1 प्रतिशत, एसीटी न्यूजीलैंड 10.5 प्रतिशत और न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी 9.3 प्रतिशत वोट के साथ अन्य प्रमुख दलों में शामिल रहे. ऑपरचुनिटी पार्टी को 5.4 प्रतिशत वोट मिले, जो संसद में प्रवेश के लिए जरूरी पांच प्रतिशत की सीमा से अधिक हैं. ये शुरुआती आंकड़े हैं और अंतिम परिणाम नहीं हैं.

Prime Minister क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में नेशनल पार्टी मौजूदा गठबंधन Government का नेतृत्व कर रही है. वहीं, लेबर पार्टी के नेता और पूर्व पीएम क्रिस हिपकिंस सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं. हिपकिंस 2023 के चुनाव में हार गए थे. इस बार उनका अभियान महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं और आम लोगों के जीवन-यापन की बढ़ती लागत जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा है.

चुनाव प्रचार के दौरान न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी प्रमुख मुद्दे रहे. देश लंबे आर्थिक सुस्ती के दौर से धीरे-धीरे उबर रहा है. बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत तक पहुंचने और घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव ने मतदाताओं की चिंताएं बढ़ाई हैं. नेशनल पार्टी ने बजट घाटा कम करने और वित्तीय अनुशासन के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का वादा किया है. वहीं, लेबर पार्टी ने स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन को सस्ता बनाने पर जोर दिया है.

इस चुनाव में ऑपरचुनिटी पार्टी भी महत्वपूर्ण भूमिका में उभरती दिखाई दे रही है. पार्टी का नेतृत्व किउले वोंग कर रही हैं. पांच प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करने के कारण पार्टी को संसद में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है. चुनाव से पहले आए सर्वेक्षणों में भी इस पार्टी को संभावित गठबंधन Government के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था. हालांकि, नेशनल पार्टी के नेता लक्सन पहले ही अवसर पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार कर चुके हैं.

न्यूजीलैंड की चुनाव प्रणाली भी इस मुकाबले को दिलचस्प बनाती है. यहां मिश्रित सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व (एमएमपी) प्रणाली लागू है. इसके तहत मतदाता दो वोट डालते हैं. पहला अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए और दूसरा किसी Political पार्टी के लिए होता है. संसद में पार्टियों की कुल सीटें मुख्य रूप से उनके पार्टी वोट के अनुपात के आधार पर तय होती हैं. इस व्यवस्था में किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर गठबंधन Government बनाना आम बात है.

वर्ष 2023 के आम चुनाव में नेशनल पार्टी को सबसे अधिक वोट मिले थे, लेकिन Government बनाने के लिए उसे न्यूजीलैंड फर्स्ट और एसीटी पार्टी के साथ गठबंधन करना पड़ा था. इस बार भी छोटे दलों के समर्थन के बिना Government गठन का रास्ता मुश्किल हो सकता है.

न्यूजीलैंड के चुनाव आयोग ने 27 नवंबर को आधिकारिक नतीजे घोषित करने का कार्यक्रम तय किया है. विदेशों में रहने वाले न्यूजीलैंड के नागरिकों के वोट और विशेष मतों की गिनती भी अंतिम परिणाम में शामिल होगी. न्यूजीलैंड की संसद में कुल 120 सीटें हैं और बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है.

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केआर/

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