इजरायल में होगी किसकी सरकार: रविवार को होगा साफ, राष्ट्रपति हर्जोग के फैसले पर टिकी निगाहे

तेल अवीव, 7 नवंबर . इजरायल में नई Government किसकी होगी इसको लेकर तस्वीर अब भी साफ नहीं है. हाल ही संपन्न हुए चुनाव को लेकर Political अनिश्चितता बनी हुई है. अब Sunday को साफ होगा कि President इसाक हर्जोग किसे मौका देते हैं. Prime Minister बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी एवं पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट, दोनों ही बहुमत के आंकड़े से दूर हैं. ऐसे में हर्जोग के सामने चुनौती बड़ी है.
President हर्जोग Sunday को Government गठन के लिए किसी एक उम्मीदवार को आमंत्रित करने वाले हैं. उन्होंने एक वीडियो मैसेज जारी कर इसकी जानकारी दी थी. उन्होंने कहा, “मैं आने वाले Sunday (8 नवंबर) को नेसेट (संसद) के एक सदस्य को Government बनाने के लिए आमंत्रित करूंगा.”
हालांकि, चुनाव बाद संसद में मिले समर्थन के आंकड़े आइजेनकोट के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनकी राह भी आसान नहीं है. इसकी बड़ी वजह अरब पार्टियों का समर्थन है, जिसे आइजेनकोट Government में शामिल करने से इनकार कर चुके हैं.
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, President के साथ Political दलों के प्रमुखों की बातचीत Thursday को पूरी हुई. इस दौरान 120 सदस्यीय नेसेट (इजरायली संसद) के 67 सदस्यों ने आइजेनकोट के समर्थन में अपनी राय दी, जबकि नेतन्याहू को 46 सांसदों का समर्थन मिला.
नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक गठबंधन के पास 53 सीटें हैं. हालांकि, उनके पुराने सहयोगी यूनाइटेड टोरा यहूदी पार्टी ने समर्थन देने से परहेज किया है. यह पार्टी अति-रूढ़िवादी यहूदियों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने के मुद्दे पर Government से नाराज है.
हर्जोग ने अभी तक किसी भी पक्ष के समर्थन में स्पष्ट संकेत नहीं दिया है. उनका कहना है कि आंकड़े भले ही एक तरफ झुकते दिखाई दे रहे हों, लेकिन दोनों खेमों के भीतर और उनके बीच मौजूद असहमतियों के कारण यह तय करना मुश्किल है कि कौन स्थिर गठबंधन बना पाएगा.
इजरायल में Government बनाने के लिए 61 सीटों का बहुमत जरूरी है. मौजूदा चुनावी स्थिति में नेतन्याहू के दक्षिणपंथी और धार्मिक गठबंधन के पास 53 सीटें हैं, जबकि आइजेनकोट का समर्थन करने वाले चार यहूदी दलों के पास 48 सीटें हैं. अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं.
आइजेनकोट को इन अरब दलों का समर्थन मिला है, जिससे उनके पक्ष में 67 सांसदों का आंकड़ा पहुंचता है. लेकिन उन्होंने इन पार्टियों को Government में शामिल करने से इनकार किया है. इन दलों में ज्वाइंट लिस्ट के 11 और यूनाइटेड अरब लिस्ट (राम) के आठ सांसद हैं.
राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने आइजेनकोट के नेतृत्व वाली Government में शामिल होने की इच्छा जताई है. वहीं, ज्वाइंट लिस्ट ने Government में शामिल होने से इनकार करते हुए बाहर से समर्थन देने की पेशकश की.
आइजेनकोट ने इन दलों के समर्थन के बावजूद उनके साथ Government बनाने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं. इनमें हमास को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता देना भी शामिल है. अब्बास ने हमास को निरस्त्र करने का समर्थन किया है, लेकिन उसे आतंकवादी संगठन कहने से परहेज किया है.
इजरायली कानून के तहत किसी उम्मीदवार के लिए 61 सांसदों का प्रत्यक्ष समर्थन होना जरूरी नहीं है. वह इससे कम समर्थन के साथ भी Government बना सकता है, बशर्ते संसद में विश्वास मत हासिल कर ले. इस आधार पर आइजेनकोट अल्पमत Government बनाने की कोशिश कर सकते हैं और बाद में अति-रूढ़िवादी दलों को अपने साथ जोड़ सकते हैं.
दूसरी ओर, नेतन्याहू के सामने भी बहुमत जुटाने की चुनौती है. उन्हें विपक्षी दलों में से किसी एक को अपने पाले में लाना होगा. एक विकल्प राष्ट्रीय एकता Government का भी है, जिसमें नेतन्याहू और आइजेनकोट के खेमे बारी-बारी से Prime Minister पद संभाल सकते हैं. हालांकि, नेतन्याहू के कई विरोधी उनके नेतृत्व में Government में शामिल होने से इनकार कर चुके हैं.
अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के लिए इस चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता में लौटने से रोकना प्रमुख मुद्दा रहा है. ज्वाइंट लिस्ट ने आइजेनकोट को समर्थन देने के अपने फैसले को जनता की उस मांग से जोड़ा है, जिसके तहत नेतन्याहू Government की वापसी रोकने की इच्छा जताई गई है.
इन पार्टियों ने बदले में इजरायल के अरब नागरिकों के लिए कुछ गारंटी मांगी हैं. इनमें घरों को गिराने की कार्रवाई रोकना, उनके खिलाफ भड़काऊ बयानों पर लगाम लगाना, समुदायों में बढ़ते अपराध पर कार्रवाई और फलस्तीनियों के Political भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा तय करना शामिल है.
Government बनाने के लिए नामित उम्मीदवार को गठबंधन तैयार करने के लिए 28 दिन मिलेंगे. जरूरत पड़ने पर यह अवधि 14 दिन और बढ़ाई जा सकती है.
यदि पहला उम्मीदवार नाकाम रहता है तो दूसरे नेता को 28 दिन का मौका दिया जाएगा. उसके बाद भी Government नहीं बनती है तो संसद का बहुमत किसी तीसरे उम्मीदवार को मौका दे सकता है, जिसके पास 14 दिन होंगे.
तीसरा प्रयास भी विफल रहने पर नेसेट भंग हो सकती है और 90 दिनों के भीतर नए चुनाव कराने पड़ सकते हैं. ऐसी स्थिति में नेतन्याहू कार्यवाहक Prime Minister के रूप में पद पर बने रहेंगे.
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केआर/


