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Sunday, 25 October 2026
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नई फिल्म के लिए रसिका दुग्गल ने सीखा पियानो का नया हुनर, बोलीं-लगन में आनंद है

नई फिल्म के लिए रसिका दुग्गल ने सीखा पियानो का नया हुनर, बोलीं लगन में आनंद है

नई फिल्म के लिए रसिका दुग्गल ने सीखा पियानो का नया हुनर, बोलीं-लगन में आनंद है

Mumbai , 25 अक्टूबर . Actress रसिका दुग्गल ने अपनी आगामी ड्रामा फिल्म ‘लिटिल थॉमस’ के लिए पियानो सीखना शुरू किया है.

उन्होंने Sunday को अपने आधिकारिक social media प्‍लेटफॉर्म एक्‍स हैंडल पर अपने विभिन्न अभ्यास सत्रों के कुछ वीडियो साझा किए, जो उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने घर पर, शूटिंग के बीच में, वैन में, और जब भी उन्हें समय और स्थान मिला, अभ्यास किया. धीरे-धीरे और तेज ताल पर और ताल से बाहर अभ्यास किया. गलतियों और हार मानने के बावजूद अभ्यास किया. कुछ गलतियों पर हंसे और कुछ को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़े.”

रसिका ने कहा, “जीवन का सबक-लगन में आनंद होता है और थोड़ा सनकी होना (अगर आप भी ऐसे ही हैं तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं क्या कह रही हूं) के भी कुछ फायदे हैं.”

‘मंटो’ की Actress ने बताया कि कुछ नया सीखने के लिए एक धैर्यवान, प्रोत्साहित करने वाला और शानदार शिक्षक चाहिए होता है.

उन्‍होंने अपनी अगली फिल्म के बारे में खुशी जाहिर करते हुए कहा,”हमारी प्यारी सी फिल्म ‘लिटिल थॉमस’ के लिए यह सब सीखना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है. अगर नया हुनर ​​सीखने को मिल जाए तो और क्या चाहिए.”

इस बीच ‘लिटिल थॉमस’ के दर्शकों तक पहुंचने से पहले रसिका ने ऐसी फिल्मों की जरूरत पर प्रकाश डाला, जिनसे बच्चे खुद को जोड़ सकें.

उन्होंने कहा, “सिनेमा हमारे संसार को विस्तृत करने और हमारी कल्पना को उड़ान देने का एक अद्भुत माध्यम है. वयस्कों के रूप में हमारे मन में आने वाले कई विचार और धारणाएं बचपन में देखी गई फिल्मों से प्रेरित होती हैं. इसलिए हमें ऐसी फिल्मों की आवश्यकता है जिनसे बच्चे जुड़ाव महसूस कर सकें, ऐसी फिल्में जो उनकी जिज्ञासा को दबाने के बजाय उसे प्रोत्साहित करें.”

रसिका ने कहा कि बच्चों के लिए बनी फिल्में मनोरंजक होने के साथ-साथ सतही भी नहीं हो सकतीं.

उन्होंने कहा, “बच्चों का सिनेमा मनोरंजक होने के साथ-साथ सतही भी नहीं हो सकता और अर्थपूर्ण होने के साथ-साथ उपदेशात्मक भी नहीं हो सकता. मैं चाहूंगी कि अधिक से अधिक फिल्म निर्माता ऐसी कहानियों पर काम करें जिनका बच्चे आनंद ले सकें और जो उनकी कल्पना के लिए नए द्वार खोलें.”

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एएसएच/वीसी

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