गोविंदपुरी में दो गुटों के बीच झड़प, फायरिंग और चाकूबाजी में 3 लोग घायल

New Delhi, 22 अक्टूबर . दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में एक अपार्टमेंट परिसर में दो गुटों के बीच हुई फायरिंग और चाकूबाजी में कम से कम तीन लोग घायल हो गए. जांचकर्ताओं ने बताया कि घटनास्थल से दो खाली कारतूस और दो चाकू बरामद किए गए हैं.
Police के अनुसार, गोविंदपुरी स्थित आशा किरण अपार्टमेंट के पास फायरिंग की सूचना मिलने पर पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी. घायलों की पहचान संजू भेषधारी उर्फ कुमार भेषधारी, मंसूर आलम और नितिन के रूप में हुई है.
संजू भेषधारी को गोली लगी है और उसे अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 40 वर्षीय मंसूर आलम को मामूली चोटें आईं, जिनका इलाज होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
तीसरे घायल नितिन को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है. उनकी चोटों की प्रकृति की जांच की जा रही है.
Police आरोपियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए कार्रवाई कर रही है. कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और मामले की आगे जांच जारी है.
इससे पहले सितंबर में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नंद नगरी इलाके में अज्ञात लोगों ने तीन घरों के बाहर फायरिंग की थी और आसपास खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की थी.
इस घटना से भी स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल बन गया था. सूचना मिलने के बाद Police ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की थी.
फायरिंग की यह घटना नंद नगरी थाना क्षेत्र के डी-2 ब्लॉक में हुई थी, जहां अज्ञात बदमाशों ने तीन घरों को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं. हालांकि घरों में रहने वाले परिवार बाल-बाल बच गए थे.
घटना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें हमलावरों को फायरिंग और पथराव करते हुए देखा गया.
एक स्थानीय महिला ने से बातचीत में बताया कि लगभग 50 अज्ञात लोगों ने उनके घर पर हमला किया था. सभी हमलावरों ने चेहरे पर मास्क पहन रखे थे.
महिला ने कहा, “हम जानते हैं कि ये लोग कौन हैं. मेरी बेटी को लेकर सात साल पहले एक विवाद हुआ था. तब से मेरे घर के बाहर अक्सर फायरिंग और पथराव होता रहा है. मेरे बेटों की पिटाई की गई है. हमें झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी जाती हैं. मुझे यह भी कहा जाता है कि वे मेरे बच्चों को गोली मार देंगे.”
उन्होंने कहा, “Friday देर रात भी हमारे तीन घरों पर हमला किया गया था. फायरिंग हुई और पत्थर फेंके गए. उस समय परिवार के सभी लोग ऊपर वाले हिस्से में थे. अगर हम नीचे होते तो किसी की जान भी जा सकती थी. हमारे बच्चे हमेशा खतरे में रहते हैं.”
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एएमटी/वीसी


