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Sunday, 1 November 2026
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कोर्ट चीफ के निलंबन पर पोलैंड में बवाल, राष्ट्रपति को लौटना पड़ा स्वदेश

कोर्ट चीफ के निलंबन पर पोलैंड में बवाल, President को लौटना पड़ा स्वदेश

वारसा, 31 अक्टूबर . पोलैंड के Supreme Court चीफ के निलंबन ने हंगामा खड़ा कर दिया है. देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है, जिसके चलते पोलिश President कैरोल नाव्रोकी को अपनी विदेश यात्रा बीच में छोड़कर स्वदेश लौटना पड़ा. यह कदम तब उठाया गया जब देश की संवैधानिक न्यायाधिकरण (टीके) के अध्यक्ष और उनके डिप्टी को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया गया. विपक्षी नेताओं ने इस कदम को “तख्तापलट” करार दिया, जबकि Prime Minister डोनाल्ड टस्क ने कानून बहाल करने के प्रयासों का बचाव किया.

पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय के शीर्ष न्यायाधीश को निलंबित किए जाने के बाद Friday रात को Police और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई.

पोलिश न्यूज एजेंसी पीएपी के अनुसार, निलंबन के इन आदेशों ने अदालत के नेतृत्व को लेकर चल रहे लंबे विवाद को और गहरा कर दिया है. यह विवाद उन पांच जजों की स्थिति को लेकर भी है, जिन्हें संसद ने चुना था, लेकिन न्यायाधिकरण अध्यक्ष बोगदान श्विएचकोव्स्की ने उन्हें मामलों की सुनवाई करने से रोक दिया था. नाव्रोकी ने इन जजों को पद की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था. बाद में, इन पांचों जजों ने संसद में आयोजित एक समारोह में शपथ ली, जिसे नाव्रोकी और श्विएचकोव्स्की वैध नहीं मानते हैं.

टीके एक विशेष अदालत है जो पोलिश कानूनों की संवैधानिक वैधता पर फैसला सुनाती है. यह संस्था कई वर्षों से न्यायिक विवादों के केंद्र में रही है. पिछली Government, जिसका नेतृत्व ‘लॉ एंड जस्टिस’ (पीआईएस) पार्टी कर रही थी, पर आरोप लगा था कि उसने अपने वफादार जजों को नियुक्त करके इस संस्था का Politicalरण कर दिया है.

Prime Minister डोनाल्ड टस्क की मध्यमार्गी गठबंधन Government, जो 2023 के अंत में सत्ता में आई थी, ने लगातार अदालत के फैसलों की अनदेखी की है और इस संस्था की वैधता पर सवाल उठाए हैं.

Friday को, उन पांच जजों में से एक, अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने श्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टलोमी सोचांस्की को एक महीने के लिए उनके कर्तव्यों से निलंबित करने का आदेश जारी किया. न्यायाधिकरण के मुख्यालय के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए.

एक जज के रूप में अपनी वरिष्ठता का हवाला देते हुए, कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने निलंबन के कानूनी आधार के रूप में पोलैंड के ‘कॉमन कोर्ट्स के संगठन से जुड़े कानून’ के अनुच्छेद 130 का इस्तेमाल किया. इस प्रावधान के तहत, किसी जज को अस्थायी रूप से उनके कर्तव्यों से हटाया जा सकता है, यदि “उन्हें कोई जानबूझकर किया गया अपराध करते हुए रंगे हाथों पकड़ा जाए, या यदि उनके द्वारा किया गया कृत्य ऐसा हो जिससे अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचे या सेवा के महत्वपूर्ण हितों के लिए उन्हें तुरंत आधिकारिक कर्तव्यों से हटाना आवश्यक हो जाए.”

नाव्रोकी ने कहा कि वे वापस लौट रहे हैं क्योंकि “ऐसे समय में, President का पोलैंड में होना जरूरी है.” वारसॉ में Police के संवैधानिक न्यायाधिकरण (कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल) की इमारत में दाखिल होने के बाद, नावरोकी ने ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी दी. बाहर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने कुछ चीजें फेंकना शुरू कर दिया था.

न्यायाधिकरण के ‘एक्स’ प्रोफाइल पर एक संदेश पोस्ट किया गया, जिसमें कहा गया कि उनकी वेबसाइट पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है और श्विएचकोव्स्की ही इस संस्था के अध्यक्ष बने हुए हैं.

अदालत के प्रवक्ता ने कहा कि “कोई चाहे कुछ भी सोचे”, संवैधानिक न्यायाधिकरण की कमान अभी भी श्विएचकोव्स्की के हाथों में है. उन्होंने यह भी कहा कि Police का दखल पहले से ही तय (सुनियोजित) था.

कोरविन-पियोट्रोव्स्का, जिन्होंने न्यायाधिकरण के कार्यवाहक अध्यक्ष का पद संभाला है, ने कहा कि उनके कदम “संवैधानिक रूप से बेहद जरूरी” थे. उन्होंने श्विएचकोव्स्की पर कई तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाया, जिसमें अदालत की ‘जनरल असेंबली’ (आम सभा) की बैठक न होने देना भी शामिल है.

संवैधानिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोलैंड की Government और President के बीच चल रहे गतिरोध का मुख्य केंद्र बन गई है. अदालत का गठन और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया, पिछली दक्षिणपंथी Government और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ‘कानून के शासन’ को लेकर हुए विवाद के प्रमुख मुद्दे थे.

यूरोपीय आयोग ने पोलैंड में लोकतंत्र के कमजोर होने और न्यायपालिका के Politicalरण के आरोपों के चलते, वहां दी जाने वाली अरबों यूरो की फंडिंग रोक दी थी.

2023 के संसदीय चुनाव में, टस्क ने न्यायपालिका की निष्पक्षता बहाल करने का मुख्य वादा किया था. इसी चुनाव के बाद उनकी गठबंधन Government सत्ता में आई. टस्क ने कहा कि कानून के शासन को बहाल करना Government का कर्तव्य है. उन्होंने कहा कि पिछली ‘लॉ एंड जस्टिस’ (पीआईएस) Government के दौरान वर्षों तक जो अराजकता रही, उसके बाद अब निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है.

Friday शाम को उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “कानून के शासन को बहाल करना हमारा कर्तव्य है. पीआईएस के दौर में वर्षों तक चली अराजकता के बाद, यह एक कठिन और कभी-कभी कष्टदायक प्रक्रिया है, जिसके लिए निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है. इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है.”

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केआर/

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