कर्नाटक में नंदिनी दूध 8 रुपए प्रति लीटर महंगा, सरकार ने कहा- डेयरी किसानों की आय बढ़ाने के लिए लिया फैसला

Bengaluru, 1 नवंबर . कर्नाटक में Sunday से नंदिनी दूध की कीमतों में 8 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू हो गई है. इसके साथ ही दही की कीमत भी 54 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 68 रुपए प्रति किलोग्राम कर दी गई है. कीमतों में इस वृद्धि के बाद उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी गई, जबकि Bengaluru मिल्क यूनियन लिमिटेड (बीएएमयूएल) और राज्य Government ने इस फैसले को डेयरी किसानों के हित में जरूरी कदम बताया है.
बीएएमयूएल के अध्यक्ष डी.के. सुरेश ने, जो Chief Minister डी.के. शिवकुमार के छोटे भाई भी हैं, मूल्य वृद्धि का बचाव करते हुए कहा कि Government का उद्देश्य किसानों की आजीविका को मजबूत करना और डेयरी क्षेत्र को टिकाऊ बनाए रखना है.
उन्होंने कहा, “यदि किसान बचेंगे तो हम सभी बचेंगे. नंदिनी दूध आपके लिए महंगा जरूर होगा, लेकिन किसानों के लिए यह अच्छी खबर है. मैं कीमत बढ़ाने के लिए क्षमा चाहता हूं, लेकिन किसानों का जीवित रहना भी जरूरी है.”
उन्होंने कहा कि शहरों में रहने वाले अनेक लोग भी ऐसे परिवारों से आते हैं जिनका संबंध पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य Government किसानों को सशक्त बनाने और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है. उन्होंने लोगों से नंदिनी ब्रांड के दूध, घी और पनीर जैसे उत्पादों का उपयोग जारी रखने की अपील भी की.
राज्य Government का कहना है कि 8 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों को बेहतर भुगतान सुनिश्चित करना है. हालांकि दूध के साथ-साथ दही की कीमतों में 14 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ा दी है.
Chief Minister डी. के. शिवकुमार ने Saturday को इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम किसानों और गायों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है और पशुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराना पहले से अधिक महंगा हो गया है.
Chief Minister ने कहा कि किसानों की ओर से दूध के दाम 12 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जबकि पड़ोसी राज्यों में दूध की कीमतें पहले से अधिक हैं. उन्होंने कहा, “यदि किसानों की आय पर्याप्त नहीं होगी तो वे पशुओं के चारे पर खर्च कम करने को मजबूर होंगे, जिसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ेगा.”
उन्होंने यह भी कहा कि Government ने इस निर्णय पर लंबे समय तक विचार करने के बाद ही इसे मंजूरी दी है. उन्होंने कहा कि सूखे के कारण घटते दूध उत्पादन, किसानों की मांग और पशुधन की सुरक्षा जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया गया है.
दही की कीमतों को लेकर उठ रहे सवालों पर Chief Minister ने कहा कि Government सीधे तौर पर दही की कीमतों को नियंत्रित नहीं कर सकती. उन्होंने बताया कि दूध और उससे बने उत्पादों की कीमतों पर वसा (फैट) की मात्रा जैसे कारकों का भी प्रभाव पड़ता है.
कर्नाटक Government और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) का मानना है कि यह बढ़ोतरी डेयरी किसानों को राहत देगी, जबकि उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इससे महंगाई का अतिरिक्त बोझ आम लोगों पर पड़ेगा. ऐसे में दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों को लेकर राज्य में बहस तेज हो गई है.
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