कोर्काई और पूमपुहार में पानी के नीचे सर्वे की रिपोर्ट फरवरी तक आएगी, तमिलनाडु के प्राचीन समुद्री इतिहास से उठेगा पर्दा

चेन्नई, 21 सितंबर . तमिलनाडु के प्राचीन समुद्री इतिहास को सामने लाने की कोशिशों को नई गति मिलने वाली है. राज्य का पुरातत्व विभाग अगले साल फरवरी तक कोर्काई और पूमपुहार में पानी के नीचे किए गए सर्वे की रिपोर्ट Government को सौंपने की तैयारी कर रहा है.

इन दस्तावेजों में कोर्काई-अजगनकुलम तट के पास किए गए सोनार सर्वे का विश्लेषण और मयिलादुथुराई जिले के पूमपुहार में पानी के नीचे चल रही खोज के तीसरे चरण के नतीजे शामिल होंगे. कोर्काई रिपोर्ट की जांच और मंजूरी मिलने के बाद पुरातत्वविद समुद्र तल के नीचे मिली संभावित संरचनाओं और कलाकृतियों की पुष्टि के लिए डाइविंग ऑपरेशन करेंगे.

अधिकारियों के अनुसार, कोर्काई में भौगोलिक पहचान सर्वे लगभग दो साल पहले इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के सहयोग से किया गया था. इसमें पानी के नीचे संभावित पुरातात्विक चीजों का पता लगाने के लिए मल्टी-बीम इको साउंडर्स, साइड-स्कैन सोनार सिस्टम और सब-बॉटम प्रोफाइलर जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था. साइड-स्कैन सोनार सर्वे का काम पहले ही पूरा हो चुका है.

अधिकारियों ने कहा कि सिर्फ सोनार इमेज से यह पता लगाना काफी नहीं था कि मिली हुई चीजें प्राचीन बंदरगाह के अवशेष हैं या नहीं. इसके लिए डाइविंग के जरिए खोज जरूरी है, ताकि पता चल सके कि क्या उन संरचनाओं में जहाज के मलबे, इमारतें या समुद्र तल के नीचे दबी अन्य पुरातात्विक चीजें शामिल हैं.

पूरा प्रोजेक्ट का लगभग 10 प्रतिशत काम अभी पूरा हुआ है. शुरुआती सर्वे में पूमपुहार में ज्यादा संभावनाएं दिखने के बाद उसे तुरंत खोज के लिए प्राथमिकता दी गई थी. पूमपुहार में पहले की खोजों में मिट्टी के बर्तन और जहाज के मलबे मिले थे, लेकिन उनके बहुत कम फोटोग्राफिक रिकॉर्ड उपलब्ध थे. नए ऑपरेशन का मकसद पानी के नीचे मिली चीजों का बेहतर फोटोग्राफिक और विजुअल दस्तावेजीकरण करना है.

बता दें कि कोर्काई संगम युग के सबसे अहम बंदरगाहों में से एक था और पांड्य साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण समुद्री केंद्र था. इसके रोमन साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंध थे और यह मोती निकालने के काम के लिए बहुत मशहूर था. 1968-69 में की गई खुदाई में कलाकृतियां, शंख काटने की वर्कशॉप और मोती वाले सीप को प्रोसेस करने की सुविधाएं मिली थीं. बुनाई और शिकार से जुड़े टेराकोटा के लैंप और हड्डी के नुकीले औजार भी मिले थे.

पुरातत्वविदों का मानना है कि पानी के नीचे की जांच से इन खोजों को और बल मिल सकता है और प्राचीन तमिल समुद्री व्यापार, नौवहन और हिंद महासागर में व्यापारिक संबंधों के बारे में नई जानकारी मिल सकती है.

एससीएच/एएस

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