अखिलेश यादव को स्कूलों में हुए बदलाव दिखाई नहीं देते, अखिलेश पर ओम प्रकाश राजभर ने साधा निशाना

Lucknow, 30 अक्टूबर . यूपी Government में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने Samajwadi Party के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर महिला आरक्षण, पीडीए की राजनीति, स्वामी प्रसाद मौर्य के इंडिया गठबंधन में शामिल होने और गोरखपुर एमएलसी चुनाव को लेकर जुबानी हमला बोला. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को महिलाओं के अधिकारों की बात करने से पहले अपने पुराने रुख पर विचार करना चाहिए.
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि Samajwadi Party और कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया था, जबकि अब वही दल महिलाओं को टिकट देने और उनके Political प्रतिनिधित्व की बात कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने एमएलसी चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणियों का जवाब देते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष का भ्रम दूर होने का दावा किया.
महिलाओं को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट देने के अखिलेश यादव के बयान पर ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि उन्हें पहले अपने विधानसभा क्षेत्र और भाजपा Government में महिलाओं की भागीदारी देखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि Samajwadi Party को वास्तव में महिलाओं की इतनी चिंता है तो महिला आरक्षण विधेयक का विरोध क्यों किया गया था? Samajwadi Party, कांग्रेस, राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं ने महिला आरक्षण का विरोध किया था. यदि आरक्षण लागू हो जाता तो 2029 से Lok Sabha और विधानसभा में महिलाओं को सुरक्षित सीटों के माध्यम से प्रतिनिधित्व मिल सकता था.
राजभर ने कहा कि जब महिला आरक्षण का मुद्दा आया था, तब विपक्षी दलों ने सदन के बाहर इसका विरोध किया था और अब वही महिलाएं के अधिकारों की बात कर रहे हैं. महिलाएं इस विरोध को भूली नहीं हैं. जब विपक्षी नेता गांवों में वोट मांगने जाएंगे तो महिलाओं से उन्हें सवालों का सामना करना पड़ेगा. महिलाएं पूछेंगी कि जब उनके अधिकारों की बात आई थी, तब विरोध क्यों किया गया था. महिलाओं के बीच इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है और इसका जवाब चुनाव में मिल सकता है.
स्वामी प्रसाद मौर्य के इंडिया गठबंधन में शामिल होने के सवाल पर राजभर ने अखिलेश यादव के बयानों पर भरोसा नहीं होने की बात कही. उन्होंने Samajwadi Party की पीडीए राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अखिलेश यादव समय-समय पर पीडीए की परिभाषा बदलते रहते हैं. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब पीडीए में ‘ए’ का अर्थ अग्रहरी भी बताया जा रहा है, जबकि पहले अगड़ा और अल्पसंख्यक जैसे वर्गों की बात होती थी. गोरखपुर एमएलसी चुनाव का उदाहरण देते हुए राजभर ने सपा पर ब्राह्मणों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पंडित संजय त्रिपाठी को पार्टी ने टिकट दिया, लेकिन Samajwadi Party के लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया और राजीव यादव को समर्थन दिया. उन्होंने सवाल किया कि यदि Samajwadi Party पीडीए और सभी वर्गों के सम्मान की बात करती है तो फिर संजय त्रिपाठी को समर्थन क्यों नहीं मिला?
उन्होंने कहा कि Samajwadi Party पर यादववादी राजनीति करने का आरोप इसलिए लगता है, क्योंकि यादव उम्मीदवार होने पर यादव मतदाता समर्थन करते हैं, लेकिन जब किसी दूसरे समाज का उम्मीदवार चुनाव लड़ता है तो उसे वैसा समर्थन नहीं मिलता. राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा कि गोरखपुर में पीडीए की राजनीति कहां चली गई थी और संजय त्रिपाठी को यादव मतदाताओं का समर्थन क्यों नहीं मिला.
अखिलेश यादव के इस आरोप पर कि एमएलसी चुनाव के दौरान Police और प्रशासन ने शिक्षकों पर दबाव बनाया, जिसके कारण मतदाता भाजपा की तरफ चले गए, राजभर ने पलटवार किया. उन्होंने सवाल किया कि राजीव यादव को वोट किसने दिया था. राजभर ने दावा किया कि मुसलमानों ने एकजुट होकर राजीव यादव को वोट दिया था. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची देखकर वास्तविक स्थिति समझी जा सकती है. राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को गोरखपुर के चुनाव परिणामों और मतदाताओं के व्यवहार पर सवालों का जवाब देना चाहिए. उन्होंने दोहराया कि संजय त्रिपाठी को यादव मतदाताओं ने समर्थन क्यों नहीं दिया, यह Samajwadi Party की पीडीए राजनीति पर बड़ा सवाल है.
अखिलेश यादव के पुराने साथियों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले होने वाले बयान पर भी ओम प्रकाश राजभर ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले अखिलेश यादव पुराने साथियों को पार्टी में आने का न्योता दे रहे थे, लेकिन अब उनके बयान बदल रहे हैं. अखिलेश यादव की बातों का कोई स्थायी अर्थ नहीं है और वह लगातार अपने Political रुख में बदलाव करते रहते हैं. एमएलसी चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन से उसकी नींद उड़ने संबंधी अखिलेश यादव की टिप्पणी पर राजभर ने कहा कि विरासत में सत्ता मिल सकती है, लेकिन बुद्धि नहीं. उन्होंने एमएलसी चुनाव के आंकड़े सामने रखते हुए कहा कि इस चुनाव में करीब 14 लाख मतदाता थे, जिनमें से लगभग आठ लाख लोगों ने मतदान किया. उन्होंने कहा कि ये मतदाता मुख्य रूप से पढ़े-लिखे वर्ग से जुड़े थे.
राजभर ने विधानसभा चुनाव के मतदाताओं की संख्या से तुलना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान करीब 14 करोड़ मतदाता होते हैं और लगभग आठ करोड़ से अधिक लोग मतदान कर सकते हैं. उन्होंने सवाल किया कि आठ लाख और आठ करोड़ के बीच का अंतर अखिलेश यादव क्यों नहीं समझ पा रहे हैं? उन्होंने दावा किया कि Governmentी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों ने भी एमएलसी चुनाव में मतदान किया है. इनमें आवास, राशन, शौचालय, आयुष्मान कार्ड, किसान सम्मान निधि और पेंशन पाने वाले लोग शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बिना पैसे दिए दस लाख से अधिक लोगों को Governmentी नौकरी मिली है. चुनाव के नतीजों के आधार पर विधानसभा चुनाव का आकलन करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव का भ्रम दूर हो जाएगा.
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भाजपा Government द्वारा ध्वस्त किए जाने के अखिलेश यादव के आरोप पर भी राजभर ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को किसी प्राथमिक विद्यालय या जूनियर हाईस्कूल में जाकर मौजूदा व्यवस्था की तुलना अपने कार्यकाल से करनी चाहिए. दोनों Governmentों के दौरान स्कूलों की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है. Samajwadi Party की Government के समय गरीब बच्चों को केवल मिड-डे मील मिलता था, जबकि मौजूदा Government में वर्ष 2017 से बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, किताबें और कॉपियां दी जा रही हैं. पहले बच्चे टाट पर बैठकर पढ़ाई करते थे, जबकि अब एनडीए Government में उन्हें टेबल और मेज की सुविधा मिल रही है. अखिलेश यादव को स्कूलों में हुए बदलाव दिखाई नहीं देते, क्योंकि वह Samajwadi Party के नजरिये से चीजों को देखते हैं. यदि वह विकास के नजरिये से शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन करें तो उन्हें बदलाव समझ में आएगा.
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पीएसके/वीसी


