Sunday , 28 February 2021

भारत की रूस से ‘महामिसाइल एस-400’ डील से अमेरिका की भौंहें चढ़ी- कूटनीतिक टकराव की संभावना


नई दिल्ली (New Delhi) . भारत अपनी सामरिक क्षमता में इजाफे के लिए सतत प्रयत्नशील है. इसी के चलते वह अरबों रुपये की रक्षा डील कर रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीद रहा है. लेकिन इस डील की लेकर अमेरिका की भौहें चढ़ी हुई हैं. अमेरिका ने कहा है कि रूस के साथ इस डिफेंस डील के लिए अमेरिका की ओर से भारत को किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के साथ की जा रही 5.5 अरब डॉलर (Dollar) के इस डील को लेकर अमेरिका भारत पर प्रतिबंध लगा सकता है. ऐसी ही एक डील के लिए अमेरिका तुर्की पर प्रतिबंध लगा चुका है.

भारत अरबों रुपये की लागत से रूस से 5 मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीद रहा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन भारत पर इस डील को रद्द करने के लिए दबाव डाल रहा है. अमेरिका ने कहा है कि अगर भारत को यूएस के साथ कूटनीतिक टकराव रोकना है तो उसे डील को रद्द करना चाहिए. अमेरिका ने कहा है कि 2017 में बने एक अमेरिकी कानून के अनुसार भारत को रूस से इस मिसाइल को खरीदने की छूट नहीं दी जा सकती है. माना जा रहा है कि 20 जनवरी को अमेरिका जो बाइडेन के नेतृत्व में नई सरकार का कार्यकाल शुरू होने के बावजूद इस नीति में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा. बाइडेन प्रशासन ने रूस के खिलाफ और भी सख्त नीति अपनाने का संकेत दिया है, इसका असर इस डील पर भी पड़ सकता है.

भारत का मानना है कि उसे चीन जैसे पड़ोसियों को ध्यान में रखते हुए मिसाइल डिफेंस सिस्टम की जरूरत है. इसके अलावा भारत ने दो टूक कहा है कि वो अपनी रक्षा जरूरतों का सामान किससे खरीदेगा ये तय करने का अधिकार नई दिल्ली (New Delhi) को है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच विस्तृत वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है, भारत की रूस के साथ विशेष और खास रणनीतिक साझेदारी चल रही है. भारत ने हमेशा से स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया है. ये हमारे रक्षा सौदों और आपूर्ति पर भी लागू होता है जो कि हमारे राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं.

वही भारत में अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा है कि हमें अपने सभी सहयोगियों से अपील करते हैं कि वे रूस के साथ सभी ऐसे सौदे रद्द कर दें जिससे कि उन पर (काउंटरिंग अमेरिका एडवरसरीज थ्रो सेंसेशन एक्ट (सीएएटीएसए) होने का अंदेशा है. इसी कानून के जरिए अमेरिका ने पिछले महीने रूस पर प्रतिबंध लगाया है. सीएएटीएसए के तहत किसी देश विशेष को छूट देने का प्रावधान नहीं है, भारत और रूस के साथ समझौते के मुद्दे पर हमने किसी तरह की छूट का निर्णय नहीं लिया है.

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