मौसमी चटर्जी : जब पहली बार निभाया अंधी लड़की का किरदार, नर्वस शुरुआत से लेकर स्टार बनने तक का सफर

New Delhi, 25 अप्रैल . यह कहानी है कि मनमोहक मुस्कान वाली एक ऐसी खूबसूरत Actress की, जिन्होंने 70 और 80 के दशक में अपनी रूमानी अदाओं से दर्शकों को दीवाना बना दिया था. न ग्लैमर की होड़, न दिखावे का शौक, बस एक शांत मुस्कान और आंखों में बसी कहानियां, उनके अभिनय को आज भी उनके चाहने वाले याद करते हैं. बात हो रही है बंगाली और हिंदी सिनेमा की Actress मौसमी चटर्जी की.

26 अप्रैल 1948 को जन्मी मौसमी चटर्जी खूबसूरत होने के साथ-साथ टैलेंटेड भी थीं, जो अपने मिलनसार स्वभाव के लिए भी जानी जाती हैं. उन्होंने महज 15 साल की उम्र में शादी की और 17 साल में एक बच्चे की मां बनीं. मौसमी चटर्जी का नाम इंदिरा चट्टोपाध्याय था. शादी के बाद ससुर ने उन्हें ‘इंदु’ नाम दिया. इंटरव्यू में मौसमी चटर्जी ने खुद यह बताया था. बंगाली फिल्मों में करियर शुरू करने के बाद डायरेक्टर तरुण मजूमदार ने इनका नाम बदलकर मौसमी रख दिया.

मौसमी चटर्जी वह Actress हैं, जिन्होंने Bollywood की उस विचारधारा को बदला, जिसमें कहा जाता था कि शादी के बाद हीरोइनें सफल नहीं हो पाती हैं. मौसमी चटर्जी ने शादी के बाद ही फिल्मों में एंट्री की और टॉप की एक्ट्रेस बनीं.

मौसमी चटर्जी बचपन से ही एक्टिंग की दीवानी थीं. उनको एक Actress बनना था. इसके सपने वे दिखा करती थीं. मौसमी कोलकाता में जहां रहती थीं, उनके घर के आसपास कई सारे फिल्मी स्टूडियो थे, जहां फिल्मों की शूटिंग चलती रही थी. वे स्कूल से जब वापसी लौटती थीं, तो वहां रुकती थीं.

कई बार अंदर झांककर देखने की भी कोशिश किया करती थीं कि किस तरह शूटिंग होती है. इसी दौरान, एक दिन जब वे वहां से गुजर रही थीं, फिल्ममेकर तरुण मजूमदार की नजर उन पर पड़ी. उन्हें मौसमी चटर्जी के रूप में ‘बालिका वधू’ मिली. एक शो में मौसमी चटर्जी ने कहा था, “जब पहली फिल्म ‘बालिका वधू’ की थी, तरुण मजूमदार ने मुझे देखा था. उन्होंने ही मुझे इस किरदार के लिए चुना.”

अपने अभिनय के अलावा मौसमी चटर्जी ने अपनी मुस्कान से लोगों का खूब दिल जीता था. टेढ़े-मेढ़े दांत और प्यारी मुस्कान ही उनकी पहचान बन चुकी थी. वे ऐसी एक्टेस रहीं, जिन्हें अपने एक्सप्रेशन दिखाने के लिए ग्लिसरीन या नकली चीजों की जरूरत नहीं होती थी. वे अपने अभिनय को इतना वास्तविक बना देती थीं कि लगता था जैसे वे खुद इसे जी रही हों. उनका एक्सप्रेशन जब स्क्रीन पर आता था, तो दर्शकों की आंखों में भी आंसू भर आते थे.

वे हर अभिनय को निभाने में इतनी माहिर हो चुकी थीं कि किसी रोल के लिए उन्हें ज्यादा तर्जुबा लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था, “जब उन्हें फिल्म ‘अनुराग’ के लिए साइन किया गया था, जिसमें अंधी लड़की का रोल था, मुझे पहले एक ब्लाइंड स्कूल में ले जाने की बात चली थी. फिल्म की शूटिंग से पहले प्रैक्टिस में ही मैंने छोटा सा सीन शूट किया था.”

उन्होंने बताया, “मैं उस समय काफी नर्वस थीं, क्योंकि मेरे सामने अशोक कुमार और नूतन जैसे बड़े-बड़े कलाकार थे. मैंने पहले कभी अंधे इंसान का रोल नहीं निभाया था. मुझे एक डायलॉग दे दिया गया और कैमरा चालू कर दिया गया. पता नहीं मैंने किस अंदाज में वह डायलॉग बोला, लेकिन सभी खुश हो गए थे. फिर मुझे उसी तरह पूरी फिल्म में काम करने के लिए कह दिया गया.”

‘अनुराग 1972’ में बनी एक भारतीय हिंदी-भाषा की ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन शक्ति सामंता ने किया. फिल्म में मौसमी चटर्जी ने नायिका के रूप में अपनी पहली फिल्म में अभिनय किया और विनोद मेहरा मुख्य भूमिकाओं में थे.

इसके बाद, उन्होंने कई प्रसिद्ध कलाकारों के साथ काम किया. उन्होंने ‘घर के मंदिर’, ‘मंजिल’, ‘अंगूर’, ‘प्यासा सावन’, ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ और ‘दुश्मन’ जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. एक ऐसी हीरोइन, जिन्होंने बिना ग्लैमर के ही सबका दिल जीत लिया.

डीसीएच/एएस

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