
New Delhi, 14 अप्रैल . वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने Tuesday को आई-पैक के सह-संस्थापक और डायरेक्टर विनेश चंदेल की गिरफ्तारी को पूरी तरह गलत बताया और इस पर जानकारी दी. Enforcement Directorate (ईडी) ने Monday को विनेश चंदेल को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया. उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई की गई, जो पश्चिम बंगाल के कथित कोयला घोटाले से जुड़ा है.
विकास पाहवा ने से बात करते हुए कहा, “यह मामला जनवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब ईडी ने आई-पैक के दफ्तर पर छापा मारा. शुरू में जांच 2020 की पुरानी First Information Report , चार्जशीट और ईडी के पुराने ईसीआईआर पर आधारित थी, जो कोयला घोटाले से संबंधित था. बाद में ईडी को एहसास हुआ कि आई-पैक का कोयला घोटाले से कोई सीधा संबंध नहीं है. इसके बावजूद एजेंसी ने एक नया ईसीआईआर और नई First Information Report दर्ज की, जिसके आधार पर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया गया.”
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये मामले आयकर अधिनियम, GST अधिनियम या आरबीआई नियमों के उल्लंघन हो सकते हैं. लेकिन, इनमें कोई ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (पीएमएलए के तहत निर्धारित अपराध) नहीं है. बिना शेड्यूल्ड ऑफेंस के ईडी का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं बनता.
पाहवा ने कहा, “ईडी ने खुद एक ‘लोकस’ (मामले में दखल का आधार) तैयार कर लिया और उसी के आधार पर गिरफ्तारी की. विनेश चंदेल आई-पैक के हेड ऑफ फाइनेंस के रूप में पहले भी कई बार ईडी के सामने पेश हो चुके थे. उन्होंने 3-4 बार एजेंसी के दफ्तर जाकर सभी दस्तावेज जमा किए और पूछताछ में पूरा सहयोग किया. फिर भी ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. मेरे हिसाब से यह गिरफ्तारी मनमानी है, जिसकी कोई जरूरत नहीं थी.”
ईडी का दावा है कि जांच के दौरान कुछ ईमेल और चैट डिलीट किए गए, जिससे सहयोग नहीं मिल रहा था. लेकिन, वरिष्ठ अधिवक्ता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि कैश में फीस लेना धोखाधड़ी नहीं है.
उन्होंने कहा, “अगर आप नई First Information Report , ईसीआईआर और लगाए गए आरोपों को देखें, तो उनमें कोई गंभीर अपराध बनता ही नहीं दिखता. आरोपों में कुछ कंसल्टेंसी फीस का 50 प्रतिशत चेक से और 50 प्रतिशत कैश में लेना, उस पर GST चुकाना और कुछ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) से लोन लेना शामिल है. ऐसे में कई लोग अपनी इनकम कैश में लेते हैं, जिस पर टैक्स लग सकता है, लेकिन इसे मनी लॉन्ड्रिंग नहीं बनाया जा सकता. GST उल्लंघन या प्राइवेट पार्टी से लोन लेना भी पीएमएलए के दायरे में नहीं आता, क्योंकि इसमें कोई धोखाधड़ी या साजिश साबित नहीं होती.”
उन्होंने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, “आई-पैक एक पेशेवर Political कंसल्टेंसी फर्म है, जो चुनावी अभियान, रणनीति और कैंडिडेट मैनेजमेंट में मदद करती है. सभी प्रमुख Political पार्टियां बिना भेदभाव के इसकी सेवाएं लेती हैं. फिलहाल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनावी प्रक्रिया चल रही है, जहां आई-पैक कई पार्टियों को सलाह दे रही है. ऐसे में यह कारण भी हो सकते हैं.”
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एससीएच/एबीएम