
तेहरान, 19 अप्रैल . ईरान के बंदरगाहों या समुद्री तट पर अमेरिका की कथित “नाकेबंदी” को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल Pakistan की मध्यस्थता में हुए संघर्षविराम का उल्लंघन है, बल्कि इसे अवैध और आपराधिक भी माना जा सकता है.
बघाई ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ नियमों का हवाला देते हुए इसे ईरान की संप्रभुता के लिए खतरनाक बताया. उन्होंने लिखा कि इस तरह की कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन करती है, जो किसी भी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग या उसकी धमकी को प्रतिबंधित करता है.
उन्होंने यूएन प्रस्ताव का भी जिक्र किया. आगे लिखा कि इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव 3314 (1974) के अनुच्छेद 3(सी) के तहत “आक्रामक कृत्य” भी माना जा सकता है, जिसमें किसी देश के बंदरगाहों या तटों की नाकेबंदी को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है.
इन नियमों और अनुच्छेदों का सामान्य अर्थ है कि इस तरह की कार्रवाई से आम नागरिकों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है और उन्हें सामूहिक रूप से दंडित किया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकता है.
28 फरवरी को यूएस-इजरायल की संयुक्त एयर स्ट्राइक ने ईरान के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई. 40 दिन तक चले संघर्ष पर आखिरकार 8 अप्रैल को अस्थायी विराम लगाने पर सहमति बनी. अब दूसरे दौर की बात के लिए दोनों पक्ष दोबारा इस्लामाबाद का रुख आगामी दिनों में करेंगे. अमेरिका के President डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ट्रुथ सोशल के जरिए इसकी जानकारी दी.
ट्रंप ने डील पर सहमति न बनने की सूरत में ईरान को बर्बाद कर देने की धमकी दी. उन्होंने कहा, “हम एक बहुत ही सही और वाजिब डील दे रहे हैं, और मुझे उम्मीद है कि वे इसे मानेंगे क्योंकि, अगर वे नहीं मानते हैं, तो यूनाइटेड स्टेट्स ईरान में हर एक पावर प्लांट और हर एक ब्रिज को उड़ा देगा. अगर वे डील नहीं लेते हैं, तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी, क्योंकि मैं वह करूंगा जो पिछले 47 साल से अमेरिका के दूसरे President ईरान के साथ नहीं कर पाए.”
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केआर/