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Friday, 30 October 2026
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राम मंदिर दान विवाद का सामने आएगा सच, आस्था पर नहीं पड़ा कोई असर: सुरेंद्र जैन

राम मंदिर दान विवाद का सामने आएगा सच, आस्था पर नहीं पड़ा कोई असर: सुरेंद्र जैन

गुरुग्राम, 21 जून . अयोध्या राम मंदिर में मिले दान में कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों के बीच विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र जैन ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

सुरेंद्र जैन ने Saturday को समाचार एजेंसी बातचीत में कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू होने के समय से ही विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए जाते रहे हैं. कभी आंदोलन को कमजोर करने, कभी भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाने, तो कभी आंदोलन से जुड़े लोगों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए ऐसे आरोप सामने आते रहे हैं.

उन्होंने कहा कि 1984 में राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू होने के बाद से ही विभिन्न स्तरों पर आरोप लगाए जाते रहे हैं. कभी मंदिर निर्माण को रोकने के लिए, कभी आंदोलन को बदनाम करने के लिए और कभी आंदोलनकारियों की निष्ठा पर सवाल खड़े करने के लिए ऐसे प्रयास किए गए. लेकिन समय-समय पर ये आरोप असत्य साबित हुए हैं. इस बार भी शुरुआती आरोप कुछ ऐसे Political व्यक्तियों द्वारा लगाए गए जिनकी विश्वसनीयता पर स्वयं सवाल उठते रहे हैं. हालांकि जब अलग-अलग स्रोतों से भी इसी प्रकार की बातें सामने आने लगीं, तब संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की मांग की.

जैन ने बताया कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश Government से एसआईटी गठन की मांग की थी. उनका कहना था कि निष्पक्ष जांच ही सभी सवालों का जवाब दे सकती है. हमें लगा कि यदि आरोपों पर चर्चा बढ़ रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. इसलिए हमने Government से एसआईटी गठित करने की मांग की ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके.”

राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की खबरों के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है. सुरेंद्र जैन ने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का हवाला देते हुए कहा कि दर्शनार्थियों की संख्या लगातार स्थिर बनी हुई है. उन्होंने बताया कि 15 जून को लगभग 92 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे. 16 जून को यह संख्या 82,250 रही, जबकि 17 जून को 80,600 और 18 जून को 83,300 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. उन्होंने कहा कि यदि लोगों का विश्वास डगमगाया होता तो मंदिर आने वालों की संख्या में गिरावट दिखाई देती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. लोगों को विश्वास है कि भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और उनके मंदिर के निर्माण से जुड़े लोग भी मर्यादा का पालन करने वाले हैं. यदि कहीं कोई कमी रह गई होगी तो उसे दूर किया जाएगा, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.

ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांगों को खारिज करते हुए सुरेंद्र जैन ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट उन संतों और व्यक्तियों का संगठन है जिन्होंने मंदिर निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित किया है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सदस्यों की नीयत और जीवन पर कोई गंभीर आरोप नहीं है. हम एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं. रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

सुरेंद्र जैन ने एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए कथित आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन चांदी की छड़ों या अन्य सामग्री के गायब होने की बात कही जा रही है, उनके संबंध में अलग-अलग संस्थाओं के नाम सामने आए हैं. उन्होंने दावा किया कि कुछ सामग्री उस समय एक अन्य संस्था, रामालय ट्रस्ट, को दिए जाने की बात कही जाती थी. इसलिए, केवल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही नहीं, बल्कि उन अन्य संस्थाओं और समितियों की भी जांच होनी चाहिए जो आंदोलन के दौरान अस्तित्व में थीं.

जैन ने कहा कि आरोप लगाने वाले व्यक्ति ने बाद में कई प्रमुख संतों और आंदोलन के नेताओं के नाम भी लिए थे. उनके अनुसार, जब ऐसे सम्मानित लोगों पर सवाल खड़े किए गए तो आरोपों की मंशा पर भी संदेह पैदा हुआ. इसके बावजूद उन्होंने कहा कि एसआईटी को इन सभी पहलुओं की जांच करनी चाहिए.

मामले की Supreme Court की निगरानी में जांच की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए वीएचपी नेता ने कहा कि संगठन किसी भी जांच से नहीं डरता. उन्होंने कहा कि हमारे मन में कोई खोट नहीं है. इसलिए किसी भी स्तर की जांच से हमें कोई संकोच नहीं है. फिलहाल 15 दिनों की समयसीमा वाली एसआईटी जांच सबसे उपयुक्त व्यवस्था प्रतीत होती है क्योंकि जांच करने वाले अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों और तथ्यों को अच्छी तरह जानते हैं. एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद यदि आगे First Information Report दर्ज करने, अतिरिक्त जांच कराने या किसी अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता महसूस होती है तो उस पर भी विचार किया जा सकता है.

सुरेंद्र जैन ने कहा कि जो लोग गंभीर आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपने दावों के समर्थन में कानूनी प्रक्रिया का भी सहारा लेना चाहिए था. उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ठोस प्रमाण हैं तो उसे First Information Report दर्ज करानी चाहिए थी या अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए था. इसके बावजूद जिन लोगों पर आरोप लगाए गए, उन्हीं लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की और एसआईटी गठित कराई. इससे स्पष्ट है कि हम जांच से पीछे हटने वाले नहीं हैं. उन्होंने दोहराया कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद यदि आवश्यकता हुई तो किसी भी न्यायिक या अन्य जांच का भी स्वागत किया जाएगा.

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पीएसके/डीएससी

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