
New Delhi, 17 मई . अमेरिका और ईरान के बीच Pakistan की मध्यस्थता में आयोजित वार्ता में अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है. हालांकि, Pakistan इस पूरी स्थिति में खुद को मध्यस्थ की तरह पेश कर रहा है, लेकिन उसकी भूमिका पर लगातार प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं. हाल के समय में ट्रंप, मुनीर को अमेरिका के करीब ला रहे हैं. ताजा हालात में वर्ल्ड ऑर्डर तेजी से बदल रहा है. Pakistan और अमेरिका के बीच ये बदलता समीकरण भी इसी वर्ल्ड ऑर्डर का एक हिस्सा माना जा सकता है.
Pakistan को लेकर अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के व्यवहार में परिवर्तन India के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान से देखने को मिल रहा है. अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ये दावा किया है कि उनके कहने पर India ने सीजफायर किया. हालांकि, India लगातार ट्रंप के इस दावे को खारिज करता आया है.
अमेरिकी President ने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों से बात करके व्यापार का आश्वासन देकर पांच घंटे के भीतर इस युद्ध को रुकवाया. हालांकि, मई 2026 में फिर ट्रंप ने ही बयान दिया कि व्यापार और ऊंचे टैरिफ की धमकी देकर केवल 5 घंटे के भीतर युद्ध रुकवाया था. इसके बाद ट्रंप ने फिर बयान दिया कि उन्होंने यह सीजफायर Pakistanी सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ के अनुरोध पर ‘एक एहसान’ के तौर पर कराया था.
दरअसल, किसी के सामने हाथ फैलाने की Pakistan की पुरानी आदत रही है. Pakistan को आर्थिक मदद के लिए अमेरिका की काफी जरूरत है और वर्तमान समय में ईरान के साथ युद्ध वाले हालात के बीच वाशिंगटन भी इस्लामाबाद का इस्तेमाल कर रहा है.
दूसरी तरफ, Pakistan को जब भी India से सैन्य या रणनीतिक स्तर पर बड़ा खतरा महसूस होता है, तो वह वाशिंगटन के पास जाता है. वह अमेरिका को यह डर दिखाता है कि दो परमाणु संपन्न देशों की जंग से पूरी दुनिया खतरे में पड़ जाएगी, जिसके बाद अमेरिका बीच में दखल देता है.
Pakistan के साथ किसी भी मामले को India हमेशा से ही द्विपक्षीय विवाद बताता है और किसी भी तीसरे देश के हस्तक्षेप का सख्ती से विरोध करता है. यही कारण है कि India ट्रंप के इन दावों को शुरुआत से ही इनकार करता रहा है और यह कहता रहा है कि India अपने फैसले किसी के दबाव में आकर नहीं लेता है.
इसका सबूत खुद Pakistan के उपPrime Minister इशाक डार हैं. इशाक डार ने भी ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए माना था कि यह सीजफायर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधी बात के बाद हुआ था, न कि ट्रंप के दबाव से.
वहीं, अमेरिकी President की अगर बात की जाए, तो उन्होंने ऐसे लगभग छह युद्धों में सीजफायर कराने का क्रेडिट खुद को दिया है. आलम यह है कि अमेरिकी President ने खुद के लिए नोबल शांति पुरस्कार की मांग भी कर दी.
दूसरी तरफ Pakistan और बांग्लादेश अपनी ऐतिहासिक कड़वाहट को भूलकर आगे बढ़ रहे हैं. बांग्लादेश में शेख हसीना की Government गिराए जाने के बाद से Pakistan के साथ इसकी नजदीकी बढ़ती नजर आई है. ऐसे में Pakistan, बांग्लादेश के साथ अपने ऐतिहासिक कड़वाहट को भूलकर India को घेरने के लिए कूटनीतिक और सैन्य पैठ बढ़ा रहा है.
वहीं, अमेरिका अपनी वैश्विक सुपरपावर की होड़ में चीन को मात देने के लिए बांग्लादेश में अपने जहाज तैनात करने की डील कर रहा है. यह स्थिति Pakistan के लिए एक बड़ा Political फायदा बन गई है, क्योंकि उसे India के ठीक बगल में अमेरिका की सैन्य छत्रछाया मिल रही है, जो New Delhi के लिए आने वाले समय में एक गंभीर रणनीतिक सिरदर्द साबित होगी.
–
केके/एबीएम