तेलंगाना पुलिस भर्ती मामला: Supreme Court ने अभ्यर्थी की उम्मीदवारी बहाल की

New Delhi, 8 जून . Supreme Court ने Monday को तेलंगाना में Police constable भर्ती के एक अभ्यर्थी की उम्मीदवारी बहाल करने का फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि राज्य की भर्ती एजेंसियों ने एक ऐसे आपराधिक मामले के आधार पर नियुक्ति से इनकार कर मनमाना रवैया अपनाया, जो एक असफल प्रेम संबंध से जुड़ा था और बाद में लोक अदालत में समझौते के जरिए समाप्त हो गया था.

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने यह फैसला सुनाया है. Supreme Court में गजुल थिरुपति नाम के युवक ने याचिका दायर की थी. इसे मंजूरी देते हुए Supreme Court ने Monday को तेलंगाना हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के उस फैसले को भी रद्द कर दिया, जिसमें ‘स्टाइपेंडरी कैडेट ट्रेनिंग Police constable’ (एससीटीपीसी) पद के लिए उनके अस्थायी चयन को रद्द किए जाने को सही ठहराया गया था.

अपने फैसले में न्यायमूर्ति मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि नियोक्ता किसी आपराधिक मामले में बरी या मुक्त हो चुके उम्मीदवार की उपयुक्तता का आकलन कर सकते हैं, लेकिन ऐसा निर्णय मनमाना नहीं होना चाहिए.

Supreme Court ने कहा, “राज्य और उसके अधिकारी मनमाने ढंग से काम नहीं कर सकते. इसलिए, जब ऐसे फैसले की न्यायिक समीक्षा की जाती है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि वह मनमाना न हो, तो यह दिखाया जाना चाहिए कि (क) रिकॉर्ड पर ऐसा सामग्री मौजूद हो जिससे यह संकेत मिले कि वास्तव में नैतिक अधमता वाला अपराध किया गया था और (ख) उम्मीदवार के खिलाफ ऐसा ठोस सामग्री हो, भले ही वह बरी या मुक्त हो गया हो.”

जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “यह कहना कि समझौते का मतलब अपराध स्वीकार करना है, बिना किसी आधार के है. इसके अलावा, यह कहना कि अपीलकर्ता ने समझौता इसलिए किया क्योंकि वह दोषी था, पूरी तरह से गलत और तर्कहीन है.”

अदालत ने यह भी दर्ज किया कि याचिकाकर्ता ने आपराधिक मामले की पूरी और सही जानकारी दी थी. इसके साथ ही, तथ्यों को छिपाने का कोई आरोप नहीं था. Supreme Court ने भर्ती अधिकारियों की इस दलील पर आपत्ति जताई कि लोक अदालत में हुआ समझौता अपराध स्वीकार करने के समान है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मामला दो वयस्कों के बीच संबंध से जुड़ा था और अधिकारियों को सिर्फ इसी आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में नकारात्मक निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए. Supreme Court ने आगे कहा कि हर प्रेम संबंध विवाह तक नहीं पहुंचता और सिर्फ इसलिए कि संबंध विवाह में नहीं बदला, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि एक पक्ष ने दूसरे के साथ धोखाधड़ी की.

इसी आधार पर Supreme Court ने हाईकोर्ट की खंडपीठ का फैसला रद्द कर दिया और सिंगल जज के उस आदेश को बहाल कर दिया, जिसमें अपीलकर्ता की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था.

अपीलकर्ता ने अपने आवेदन में बताया था कि उस पर पहले आईपीसी की धारा 417, 420 और 506 (धारा 34 के साथ) के तहत मामला दर्ज किया गया था. यह मामला एक महिला ने दर्ज कराया था, जिसने आरोप लगाया था कि उसने उससे शादी करने का वादा किया था लेकिन बाद में किसी और महिला से शादी कर ली. बाद में 2015 में लोक अदालत में इस मामले को सुलझा लिया गया था. इसके बावजूद तेलंगाना राज्य स्तरीय Police भर्ती बोर्ड ने उसके प्रोविजनल सिलेक्शन को रद्द कर दिया था.

डीसीएच/

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