
New Delhi, 8 जून . दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली जिम खाना क्लब, इंडियन पोलो क्लब और दिल्ली रेस क्लबों की जमीन को वापस लेने के केंद्र Government के फैसले पर सवाल खड़ा किया है.
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदूषण की वजह से दिल्ली का पहले ही दम घुट रहा है और लुटियंस दिल्ली में थोड़ा बहुत ग्रीन- स्पेस बचा है, उसे भी Government कब्जे में लेना चाहती है. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह टिप्पणी जमीन खाली करने के केंद्र Government के नोटिस के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए की.
जस्टिस कृष्णा ने कहा कि Government को पोलो क्लब या जिम खाना की जमीन क्यों चाहिए. पिछले 200 सालों से Government को इन जमीन की जरूरत नहीं थी अब ग्राउंड की जमीन खाली करा कर Government क्या करना चाहती है! वो ही बेहतर जानती होगी, लेकिन दिल्ली में हर जगह निर्माण और बहुमंजिला इमारतों से शहर की सांस घुट रही है.
केन्द्र Government की ओर से पेश वकील आशीष दीक्षित ने Government के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि जनकल्याण के लिए Government यह जमीन खाली कर रही है. Government के पास जमीन सीमित है और देश की बढ़ती आबादी की जरूरतों के मद्देनजर इन्हीं जमीन से काम चलाना है. पोलो क्लब में सिर्फ चुनिंदा 300 लोग ही सुविधा का फायदा उठा रहे हैं!
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने इस पर कहा कि थोड़ी बहुत जो राहत एनडीएमसी इलाकों में बची थी, अब वो भी खत्म होने जा रही है. अगर ऐसे ही ऊंची बिल्डिंग बनती रही तो इससे तो इस शहर का दम घुट जाएगा. आप चाहते हैं कि दिल्ली वाले दिल्ली छोड़कर किसी छोटे-मोटे पहाड़ में चले जाएं और वहीं जाकर रहें. दिल्ली हमारे रहने की जगह ही नहीं रहे. आप जो 20 मंजिला बिल्डिंग बना रहे हो, क्या वो जनहित में है. अगर आप ऐसे ही दिल्ली बनना चाहते हैं तो भगवान हमारी रक्षा करें!
हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी जरूर की लेकिन इंडियन पॉलो एसोसिएशन को कोई राहत का आदेश नहीं दिया. हाई कोर्ट ने अपने स्तर पर याचिका का निपटारा करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट से कहा है कि वो इंडियन पोलो एसोसिएशन की पेंडिंग याचिका पर 10 जून को सुनवाई कर जल्द कोई फैसला फैसला ले.
–
एमएस/