
कोलकाता, 8 जून . तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कुछ सांसदों और विधायकों द्वारा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन दिए जाने की अटकलों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. इस मुद्दे पर टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा कि यह कदम पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है.
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जिन नेताओं के एनडीए के साथ जाने की चर्चा है, वे वही लोग हैं जिन्होंने “दीदी, दीदी” के नारे लगाकर और पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी के नाम का इस्तेमाल कर टिकट हासिल किया था. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वही नेता अब भाजपा के साथ जाने की सोच रहे हैं तो यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है. उनके अनुसार, ऐसी राजनीति को जनता अच्छी नजर से नहीं देखती और इससे नेताओं की साख पर गंभीर असर पड़ता है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला केवल राज्य स्तर का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा है. कुणाल घोष ने कहा कि वे केवल राज्य के प्रवक्ता हैं और राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता, जैसे Lok Sabha में नेतृत्व संभालने वाले प्रतिनिधि, ही आधिकारिक टिप्पणी कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर यह विषय उच्च स्तर पर विचाराधीन है.
इसी बीच टीएमसी के ही विधायक अशोक देब ने पार्टी में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव को लेकर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि चंद्रिमा भट्टाचार्य को राज्य अध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी उन्हें समाचार माध्यमों से मिली और इस निर्णय के बारे में पहले से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी. इससे पार्टी के अंदर संवाद और संगठनात्मक प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं.
वहीं, कुणाल घोष ने वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के Political रुख पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि कुछ नेता समय-समय पर पार्टी छोड़ते और वापस आते रहे हैं. उन्होंने इसे व्यक्तिगत Political निर्णय बताते हुए इस पर अधिक टिप्पणी करने से इनकार किया.
एनडीए में संभावित शामिल होने वाले नेताओं को लेकर कुणाल घोष ने भाजपा पर पूरी तरह दोषारोपण करने से इनकार किया. हालांकि, उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ रहे हैं, वे “सस्ती राजनीति” कर रहे हैं और यह उनके Political भविष्य पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा में जाने की प्रवृत्ति कई नेताओं की रणनीतिक सोच का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इससे टीएमसी कमजोर नहीं होगी.
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एसएके/डीकेपी