
New Delhi, 30 अप्रैल . Supreme Court ने Thursday को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. पवन खेड़ा के खिलाफ असम Police ने मानहानि और जालसाजी का केस दर्ज किया था. यह केस तब दर्ज किया गया था, जब कांग्रेस नेता ने असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर आरोप लगाए थे.
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने Thursday को मामले में सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों की दलील सुनी. इसके बाद बेंच ने फैसले को सुरक्षित रखा. आगे कोर्ट तय करेगा कि पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत दी जाए या नहीं.
Thursday को सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है. सिंघवी ने कहा, “पवन खेड़ा पर जो आरोप है, वह शिकायकर्ता की मानहानि करने का है. आरोप सही हैं या नहीं, यह ट्रायल में तय होगा, लेकिन इस केस में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है. मानहानि के आरोप में पूछताछ की जा सकती है. गिरफ्तारी की जरूरत नहीं है.”
हालांकि, असम Government की तरफ से अदालत में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत का विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि पवन खेड़ा ने झूठे दावे करने के लिए पासपोर्ट समेत कई जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था. इसलिए, यह पता लगाने के लिए उनकी हिरासत जरूरी है कि इस काम में उनके कौन-कौन साथी शामिल थे और क्या इसमें कोई विदेशी तत्व भी शामिल हैं.
मेहता ने कहा कि (हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर) एंटीगुआ के पासपोर्ट होने का आरोप लगाया गया. एंटीगुआ वह देश है जहां भगोड़े जाते हैं. नागरिकता के बारे में लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे हैं. पासपोर्ट की कॉपी नकली है, छेड़छाड़ कर बनाई गई है. सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “एक जांच एजेंसी के तौर पर जानना जरूरी है कि उन्होंने यह डॉक्यूमेंट कैसे नकली बनाया? अगर यह नकली है तो किसने उसे नकली बनाने में मदद की?”
बता दें कि मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप में यह मामला पवन खेड़ा के खिलाफ तब दर्ज किया गया, जब उन्होंने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां हैं. इस मामले में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी. असम Police 7 अप्रैल को खेड़ा के दिल्ली स्थित घर गई थी, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं थे.
बाद में पवन खेड़ा ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को उन्हें एक हफ्ते की राहत दी, लेकिन असम के अदालत का रुख करने का भी निर्देश दिया. 15 अप्रैल को, असम Government की अपील पर Supreme Court ने तेलंगाना हाईकोर्ट के 10 अप्रैल के आदेश पर रोक लगा दी.
इसके बाद, 17 अप्रैल को Supreme Court ने ट्रांजिट जमानत की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने पवन खेड़ा से कहा कि वह इसके बजाय गुवाहाटी हाईकोर्ट में अर्जी दें. तब खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट में अर्जी दी. गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद, खेड़ा ने Supreme Court में मौजूदा याचिका दायर की.
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डीसीएच/