
New Delhi, 10 सितंबर . India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले Supreme Court कॉलेजियम ने Thursday को दिल्ली, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, और Jharkhand हाई कोर्ट में नई नियुक्तियों की सिफारिश की.
Supreme Court कॉलेजियम ने कर्नाटक हाई कोर्ट के जज के तौर पर ज्यूडिशियल ऑफिसर उषा रानी, के.एस. भरत कुमार और नेराले वीरभद्रैया भवानी की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.
Thursday को हुई बैठक में Supreme Court कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति के लिए आठ ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के नामों की भी सिफारिश की. जिन ज्यूडिशियल ऑफिसर्स की सिफारिश की गई है, उनमें गुरविंदर पाल सिंह, निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा-I, भरत पाराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं.
Supreme Court की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक बयान में कहा गया, “Supreme Court कॉलेजियम ने 10 सितंबर, 2026 को हुई बैठक में इन ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को दिल्ली हाई कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.”
इसके अलावा, Supreme Court कॉलेजियम ने ज्यूडिशियल ऑफिसर यश पॉल बॉर्नी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी.
इसने ज्यूडिशियल ऑफिसर मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को Jharkhand हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने की भी सिफारिश की.
हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति से जुड़े ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ के अनुसार, नियुक्ति का प्रस्ताव संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा उस हाई कोर्ट के दो सबसे सीनियर जजों के साथ सलाह-मशविरा करके शुरू किया जाता है. चीफ जस्टिस यह सिफारिश Chief Minister को भेजते हैं, जो इसे गवर्नर को भेजते हैं. इसके बाद गवर्नर संबंधित जानकारी और दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव को केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री को भेजते हैं.
इसके बाद केंद्र Government इस प्रस्ताव पर कार्रवाई करती है और इसे India के चीफ जस्टिस (सीजेआई) के सामने रखती है, जो सिफारिश को अंतिम रूप देने के लिए Supreme Court के सबसे सीनियर जजों से सलाह-मशविरा करते हैं.
कॉलेजियम की मंजूरी के बाद, सिफारिश केंद्र Government को भेजी जाती है. President द्वारा नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर करने और न्याय विभाग द्वारा India के राजपत्र (गजट) में अधिसूचना जारी करने के बाद नियुक्तियां प्रभावी होती हैं.
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एससीएच/डीकेपी