
Mumbai , 17 मई . Actress सोनाक्षी सिन्हा की अपकमिंग फिल्म ‘सिस्टम’ रिलीज के लिए तैयार है. इस बीच प्रमोशन में व्यस्त सोनाक्षी ने सिनेमा के उद्देश्य पर बात की. अपनी स्पष्ट राय रखते हुए उन्होंने बताया कि फिल्मों का एकमात्र मकसद समाज में बदलाव लाना नहीं है. फिल्में सिर्फ समाज सुधारने के लिए नहीं, मनोरंजन के लिए भी बनती हैं.
अभिनत्री का मानना है कि फिल्में मुख्य रूप से मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं और नैतिक शिक्षा देना फिल्म मेकर्स का काम नहीं है.
से खास बातचीत में सोनाक्षी ने कहा, “मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि फिल्मों को सिर्फ समाज को सही रास्ते पर लाने का जरिया माना जाए. फिल्में मनोरंजन के लिए भी बनाई जाती हैं. सही और गलत की शिक्षा हमें अपने माता-पिता और स्कूल से मिलनी चाहिए. यह एक्टर्स या फिल्म मेकर्स काम नहीं है.”
सोनाक्षी ने बताया, “आज हम एक वकील की कहानी बनाएंगे, कल हम एक सीरियल किलर की कहानी बना सकते हैं. इसका यह मतलब नहीं है कि लोग जाकर दूसरों को मारना शुरू कर दें. नैतिक मूल्य और सिद्धांत घर पर सिखाए जाते हैं. यह सिखाना हमारा काम नहीं है.”
Actress ने स्पष्ट किया कि फिल्मों में 12, 16 या 18 साल के दर्शकों के लिए उम्र के हिसाब से रेटिंग्स होती हैं. दर्शक खुद सही और गलत के बीच फर्क समझने में सक्षम हैं.
सोनाक्षी ने बताया, “कई बार फिल्मों को लेकर बड़ी बहस छिड़ जाती है कि यह गलत है, इसे दिखाना नहीं चाहिए. माफ कीजिए, लेकिन फिल्म एक कहानी है. दर्शकों को फिल्म को मनोरंजन के तौर पर देखना चाहिए. आखिरकार यह सिर्फ एक कहानी होती है.”
उन्होंने यह भी कहा कि कला समाज का आईना होती है. फिल्में अक्सर असल जिंदगी की घटनाओं या सच्ची कहानियों पर आधारित होती हैं. अगर कोई फिल्म ‘सिस्टम’ की तरह दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दे तो यह अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर फिल्म समाज सुधारने की जिम्मेदारी ले.
सोनाक्षी सिन्हा की फिल्म ‘सिस्टम’ 22 मई को प्राइम वीडियो पर रिलीज होने जा रही है. फिल्म का निर्माण पम्मी बावेजा, हरमन बावेजा और स्मिता बालिगा ने किया है. अश्विनी अय्यर की फिल्म में सोनाक्षी के साथ Actress ज्योतिका भी नजर आएंगी.
–
एमटी/एएस