सावित्री ठाकुर ने शेखावत से की मुलाकात, मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से वापस लाने की मांग

धार, 28 मई . Madhya Pradesh के धार से सांसद और Union Minister सावित्री ठाकुर ने New Delhi में केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की. उन्होंने लंदन म्यूजियम से मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाकर धार की ऐतिहासिक भोजशाला में फिर से स्थापित करने का अनुरोध किया. इस पर केंद्र Government ने India की सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने के प्रयासों का आश्वासन दिया और जून में धार का दौरा करने पर सहमति जताई.

सावित्री ठाकुर ने से बातचीत के दौरान कहा कि उन्होंने मंत्री शेखावत से खास तौर पर यह अनुरोध किया है कि लंदन संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को India वापस लाया जाए और उसे धार स्थित भोजशाला में फिर से स्थापित किया जाए. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक प्रतिमा का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आस्था से जुड़ा बहुत बड़ा विषय है.

उन्होंने कहा कि इस दिशा में लंबे समय से प्रयास चल रहे हैं. 2014 से पहले भी इस मुद्दे पर कई बार चर्चा हुई थी और अलग-अलग स्तर पर कोशिशें की गई थीं. अब एक बार फिर से इसे गंभीरता से आगे बढ़ाने की जरूरत है. उनके अनुसार, जब से वे Political जीवन में आई हैं, तब से ही भोजशाला और उससे जुड़ी परंपराओं से उनका जुड़ाव रहा है.

सावित्री ठाकुर ने यह भी बताया कि इस विषय पर Madhya Pradesh के Chief Minister मोहन यादव से भी चर्चा हुई है और राज्य Government भी इस दिशा में प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों मिलकर इस सांस्कृतिक धरोहर को वापस लाने के लिए काम कर रहे हैं.

मंत्री शेखावत के साथ हुई बैठक के दौरान उन्हें यह भी आश्वासन मिला कि India की सांस्कृतिक विरासत को वापस लाने की दिशा में Government पूरी तरह गंभीर है. साथ ही, यह भी तय हुआ है कि वे जून महीने में धार का दौरा करेंगे और भोजशाला से जुड़े मुद्दों को करीब से समझेंगे.

सावित्री ठाकुर ने कहा कि अदालत के फैसलों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर भोजशाला को एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल के रूप में देखा जाता है. ऐसे में मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय है.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह प्रतिमा वापस आती है तो इसे सिर्फ भोजशाला में स्थापित करना ही नहीं, बल्कि वहां एक भव्य सांस्कृतिक परिसर विकसित करने की भी योजना होनी चाहिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोग भारतीय संस्कृति को बेहतर तरीके से समझ सकें.

पीआईएम/डीकेपी

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