सौगत रॉय का लोकसभा स्पीकर से सवाल, कहा- ‘बागी सांसदों पर अयोग्यता की याचिका लंबित, फिर भी अलग बैठने की व्यवस्था क्यों?’

New Delhi, 19 जुलाई . संसद के मानसून सत्र से पहले Saturday को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर Government के खिलाफ विरोध दर्ज कराया. बैठक में शामिल होने पहुंचे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद सौगत रॉय ने Lok Sabha अध्यक्ष द्वारा नेशनल कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए टीएमसी के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था किए जाने पर सवाल उठाया.

सौगत रॉय ने पत्रकारों से कहा कि बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर Lok Sabha अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिका लंबित है. उन्होंने कहा, “यह फैसला अध्यक्ष को करना है. हमने उनके समक्ष अयोग्यता की याचिका दायर कर रखी है.”

उन्होंने दावा किया कि देर रात तक Lok Sabha अध्यक्ष ने बागी सांसदों के गुट को अलग Political दल के रूप में मान्यता नहीं दी थी.

संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से टीएमसी के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किए जाने पर भी टीएमसी ने आपत्ति जताई. सौगत रॉय ने कहा, “हम इसका विरोध करते हैं और आगे भी विरोध करेंगे.”

इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए विपक्षी दलों ने बैठक से वॉकआउट किया. सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि जिस गुट को अभी तक मान्यता नहीं मिली है, उसे सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किया गया, जिससे बैठक की परंपरा और गरिमा प्रभावित हुई है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि विपक्ष का वॉकआउट Lok Sabha अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री के रवैये के विरोध में था. उन्होंने कहा कि टीएमसी के तथाकथित बागी सांसदों को बैठक में शामिल करने का फैसला स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल Political दलों में दलबदल को बढ़ावा दे रहा है, जो लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी Government और Lok Sabha अध्यक्ष की आलोचना की. उन्होंने कहा कि टीएमसी में विभाजन से जुड़ा मामला अध्यक्ष के समक्ष लंबित होने के बावजूद बागी गुट को सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया. उनके अनुसार, यह सर्वदलीय बैठक की गरिमा और विश्वसनीयता के विपरीत है.

ब्रिटास ने आरोप लगाया कि Lok Sabha अध्यक्ष की भूमिका निष्पक्ष संरक्षक के बजाय सत्तारूढ़ दल के हितों के अनुरूप दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि संसद की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से जुड़ी संस्थागत परंपराएं कमजोर पड़ रही हैं तथा केंद्र Government का मौजूदा रवैया देश के हित में नहीं है.

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एसएके/एएस

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