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Saturday, 17 October 2026
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राजस्थान हाई कोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, 3 साल तक सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाई

Rajasthan  हाई कोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, 3 साल तक social media इस्तेमाल पर रोक लगाई

जोधपुर/New Delhi, 9 जुलाई . Rajasthan हाई कोर्ट ने Thursday को एक ऐसे व्यक्ति को जमानत दे दी, जिस पर एक नाबालिग लड़की की फोटो को मॉर्फ करके social media पर अपलोड करने का आरोप था. कोर्ट ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें भी लगाईं, जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड और स्नैपचैट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर तीन साल की रोक शामिल है.

जोधपुर बेंच के जस्टिस अशोक कुमार जैन की सिंगल बेंच ने राजसमंद जिले के भीम Police स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 77 के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए यह आदेश दिया.

Rajasthan हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी तीन साल की अवधि के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, थ्रेड, स्नैपचैट आदि सहित किसी भी social media प्लेटफॉर्म का उपयोग न करने के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष एक वचन-पत्र जमा करेगा.

अदालत ने आगे निर्देश दिया कि यदि यह पाया जाता है कि आवेदक-आरोपी अपने नाम या किसी फर्जी नाम से किसी भी social media प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है तो ट्रायल कोर्ट द्वारा ही उसका जमानत आदेश वापस लिया जा सकता है.

अदालत के आदेश में आरोपी को पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से संपर्क करने से भी रोका गया है और निर्देश दिया गया है कि वह ट्रायल कोर्ट द्वारा आपराधिक मामले के निपटारे तक पीड़िता या उसके परिवार के किसी भी सदस्य से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं करेगा या संदेश नहीं भेजेगा.

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी साल फरवरी में First Information Report नाबालिग पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई थी. यह शिकायत 18 सितंबर और 16 अक्टूबर, 2025 के बीच हुई कथित घटना के संबंध में थी.

जांच के दौरान, Police ने आरोपी को गिरफ्तार किया और बाद में बीएनएस की धारा 77, बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 11 और 12 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67ए के तहत चार्जशीट दाखिल की.

अदालत के आदेश में दर्ज है कि पीड़िता का बयान पहले ही अभियोजन पक्ष के गवाह-1 के रूप में दर्ज किया जा चुका है, जबकि शिकायतकर्ता का बयान ट्रायल कोर्ट के समक्ष पीडब्यू-2 के रूप में दर्ज किया गया है.

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है और जांच पूरी हो चुकी है, जिससे उसे आगे हिरासत में रखकर पूछताछ करने की आवश्यकता नहीं है.

यह भी कहा गया कि आरोपी के खिलाफ एकमात्र आरोप यह था कि उसने पीड़िता की एक मॉर्फ्ड तस्वीर तैयार की थी और उसे social media पर अपलोड किया था.

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी 2 अप्रैल 2026 से हिरासत में है और यदि अदालत की यह राय है कि उसने ऐसे प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया है तो वह social media का उपयोग न करने का वचन देता है. बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी एक युवा है जिसकी पीड़िता से दोस्ती थी और उन्होंने उसके लिए खुद को सुधारने का मौका मांगा.

इस अर्जी का विरोध करते हुए, शिकायतकर्ता के वकील और Governmentी वकील ने कहा कि पीड़िता का बयान पहले ही ट्रायल कोर्ट के सामने दर्ज किया जा चुका है.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, Rajasthan हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूदा आरोपी पर आरोप है कि उसने पीड़िता को बदनाम करने के लिए एक मॉर्फ्ड तस्वीर तैयार की.

जस्टिस जैन ने कहा, “आरोपी ने social media का गलत इस्तेमाल किया है, इसलिए कम से कम तीन साल तक social media के इस्तेमाल पर रोक लगाना उचित है ताकि वह किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल न करने का सबक सीख सके.”

कोर्ट के आदेश में जज ने आगे कहा कि पीड़िता और शिकायतकर्ता के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं, इसलिए किसी भी तरह के प्रभाव की कोई गुंजाइश नहीं है.

जमानत देते हुए जस्टिस जैन ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए 50,000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो जमानत जमा करे.

Rajasthan हाई कोर्ट ने आरोपी को सुनवाई के लिए तय तारीखों पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होने का निर्देश भी दिया और स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तों का कोई भी उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है.

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डीकेएम/डीकेपी

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