
New Delhi, 18 जुलाई . Odisha के पुरी में Saturday को लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए उमड़ पड़े. ये तीनों देवता वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा के तहत गुंडिचा मंदिर के सामने अपने भव्य रथों पर विराजमान हैं.
देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु भाई-बहन देवताओं के दिव्य दर्शन करने और India के सबसे पवित्र धार्मिक त्योहारों में से एक में शामिल होने के लिए इस तीर्थ स्थल पर जमा हुए. माहौल भक्ति से भरा हुआ था. भक्त भजन गा रहे थे, प्रार्थना कर रहे थे और आशीर्वाद मांग रहे थे.
त्योहार का आयोजन सुचारू रूप से हो, इसके लिए पुरी Police ने भीड़ को संभालने और भक्तों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे. अहम जगहों पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि अधिकारी सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पर नजर रखे हुए थे.
एक भक्त ने कहा कि मैं प्रार्थना करता हूं कि भगवान सभी को सद्बुद्धि दें, दुनिया में शांति लाएं और चल रहे झगड़ों को खत्म करें. वे सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से इंतजाम अच्छे हैं.
अंतरराष्ट्रीय भक्तों में हंगरी की राधिका लीला देवी भी शामिल थीं, जिन्होंने रथ यात्रा देखने के गहरे आध्यात्मिक अनुभव के बारे में बात की.
उन्होंने कहा कि जब मैं यहां भक्तों को देखती हूं, तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं. मैं उनके चेहरों पर कई तरह के भाव देख सकती हूं कुछ रो रहे हैं, तो कुछ मुस्कुरा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि मैंने अभी एक महिला को देखा जो भगवान के लिए प्रसाद के तौर पर चावल लाई थी. यहां सभी की भक्ति देखकर मेरा मन भर आता है.
राधिका लीला देवी ने कहा कि मेरी आंखों में आंसू सिर्फ इसलिए नहीं आते कि मैं भगवान से प्यार करती हूं, बल्कि इसलिए भी कि मैं उनसे पूछती रहती हूं, ‘मैं आपके लिए वैसा प्यार कब महसूस कर पाऊंगी. भगवान सबसे शक्तिशाली चुंबक हैं, इससे ज्यादा शक्तिशाली कुछ भी नहीं है.
India के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक त्योहारों में से एक, विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा Thursday को पुरी में शुरू हुई. इसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य वार्षिक शोभायात्रा देखने के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालु पहुंचे.
सदियों पुराने इस त्योहार का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा मौका होता है जब जगन्नाथ मंदिर के मुख्य देवता गर्भगृह से बाहर निकलते हैं और पुरी की सड़कों पर यात्रा करते हैं, जिससे जीवन के हर क्षेत्र से आए भक्त उनका आशीर्वाद ले पाते हैं. रथ यात्रा के दौरान, भाई-बहन के रूप में पूजे जाने वाले तीनों देवी-देवताओं को शानदार ढंग से सजाए गए लकड़ी के रथों पर पूरे विधि-विधान के साथ बिठाया जाता है. हजारों भक्त भक्तिपूर्ण मंत्रों, धार्मिक गीतों और गहरी आस्था के माहौल के बीच इन रथों को खींचते हैं.
यह सालाना यात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक देवी-देवताओं की पवित्र यात्रा का प्रतीक है. परंपरा के अनुसार, वे वहां अपनी मौसी से मिलने के लिए कुछ दिन रुकते हैं. यह यात्रा ईश्वरीय करुणा, सबको साथ लेकर चलने की भावना और भगवान जगन्नाथ की उस इच्छा को दर्शाती है जिसके तहत वे सामाजिक या सांस्कृतिक भेदभाव से परे, सभी को आशीर्वाद देने के लिए अपने भक्तों के बीच आते हैं.
हर साल, इस उत्सव में India और दुनिया भर से तीर्थयात्री, संत और पर्यटक बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, जिससे यह देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बन जाता है.
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डीकेएम/वीसी