
New Delhi, 20 अगस्त . Political विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की टीम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े चार सदस्यों को शामिल किए जाने की खबर के बाद सियासत तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इस फैसले को लेकर केंद्र Government और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.
कांग्रेस और Samajwadi Party के नेताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा के क्षेत्र में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ाया जा रहा है और पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से देश के इतिहास तथा संविधान की व्याख्या को बदलने की कोशिश की जा रही है.
Lucknow में कांग्रेस नेता राकेश राठौर ने केंद्र Government और संघ पर जुबानी हमला किया. उन्होंने कहा कि देश के तमाम संस्थानों पर संघ का प्रभाव बढ़ता जा रहा है. संस्थानों के निदेशक और प्रमुख पदों पर ऐसे लोगों की नियुक्ति की जा रही है, जिनकी विचारधारा संघ से जुड़ी है. देश में पूरी तरह से नफरत का माहौल तैयार किया जा रहा है और यह भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
Mumbai में कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा कि Government देश के इतिहास और संविधान की मौजूदा व्याख्या को बदलना चाहती है. संविधान ने देश के नागरिकों को समानता का अधिकार दिया है और सभी लोगों को बराबरी का दर्जा प्रदान किया है. संविधान ने आम नागरिकों को जो अधिकार और ताकतें दी हैं, उसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने दावा किया कि ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी. नई पीढ़ी, जिसमें जेनजी और जेन अल्फा शामिल हैं, वह अपने स्कूलों में सवाल पूछ रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी राय रख रहे हैं. शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए Government के पास कोई ठोस योजना नहीं है. इतिहास और संविधान में बदलाव करना ही उसका प्रमुख एजेंडा बन गया है.
Lucknow में Samajwadi Party के सांसद आरके चौधरी ने भी पैनल में आरएसएस सदस्यों को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सवाल उठना स्वाभाविक है, क्योंकि आरएसएस की विचारधारा संविधान की मूल भावना से अलग है. संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें देश के सभी नागरिकों को समानता और न्याय का अधिकार देने की बात कही गई है.
आरके चौधरी ने आरोप लगाया कि आरएसएस एक ऐसी व्यवस्था की पक्षधर है, जिसमें सदियों से चली आ रही सामाजिक असमानता और भेदभाव की स्थिति बनी रहे. शिक्षा व्यवस्था में ऐसे विचारों को बढ़ावा देना संविधान की मूल भावना के विपरीत होगा.
Mumbai में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि एनसीईआरटी की टीम में आरएसएस से जुड़े सदस्यों को शामिल किए जाने को केवल चार लोगों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक वैचारिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश बताया.
हुसैन दलवई ने आरोप लगाया कि संघ लंबे समय से शिक्षा तंत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. यदि देश को हिंदुत्व की विचारधारा की दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही है, तो शिक्षा प्रणाली को प्रभावित करना उस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है. उन्होंने इसे एक सुनियोजित प्रयास बताते हुए कहा कि जनता को ऐसी कोशिशों का विरोध करना चाहिए. जनता अब Political दलों और संगठनों की रणनीतियों को समझने लगी है.
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पीएसके/एबीएम