उत्तर प्रदेश: सरकारी योजनाओं से बदली डेयरी क्षेत्र की तस्वीर, युवाओं के लिए बन रहा रोजगार का सशक्त माध्यम

बस्ती, 1 जून . उत्तर प्रदेश में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र लगातार विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है. Governmentी योजनाओं, आसान ऋण सुविधाओं और तकनीकी सुधारों के चलते पशुपालकों को न केवल आर्थिक मजबूती मिल रही है, बल्कि यह क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार का एक स्थायी और लाभकारी विकल्प भी बनकर उभरा है. इसी क्रम में पशुपालक हर्ष पटेल ने केंद्र की योजनाओं की सराहना की.

पशुपालक हर्ष पटेल ने बताया कि उनका परिवार पिछले 26 वर्षों से पशुपालन के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है. इस व्यवसाय की शुरुआत उनके पिता ने की थी और अब वह इसे आधुनिक तकनीकों तथा Governmentी योजनाओं के सहयोग से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं.

हर्ष पटेल ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य Government द्वारा संचालित कई योजनाओं का लाभ उन्हें मिला है, जबकि कुछ योजनाओं का लाभ भविष्य में लेने के लिए वह प्रयासरत हैं.

उन्होंने बताया कि पहले पशुपालन के लिए ऋण प्राप्त करने में अनेक प्रकार की जांच, दस्तावेज और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब इस प्रक्रिया में काफी सरलता आई है. इसके अलावा, किसान क्रेडिट कार्ड, जो पहले मुख्य रूप से फसल उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता था, अब पशुपालन क्षेत्र को भी समर्थन प्रदान कर रहा है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक सहायता मिलने लगी है.

उन्होंने बताया कि Governmentी निगरानी में संचालित संस्थाओं और डेयरी समितियों से जुड़ने का लाभ पशुपालकों को सीधे तौर पर मिल रहा है. पहले दूध बिक्री का भुगतान लगभग 40 दिनों बाद प्राप्त होता था, जबकि अब भुगतान साप्ताहिक आधार पर मिलने लगा है, जिससे पशुपालकों की नकदी प्रवाह की समस्या काफी हद तक दूर हुई है.

हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि जिस प्रकार किसानों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया जाता है, उसी प्रकार दुग्ध के लिए भी एमएसपी तय किया जाना चाहिए ताकि दुग्ध उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके.

बीमा योजनाओं के संबंध में हर्ष पटेल ने कहा कि केंद्र और राज्य Government की संयुक्त पशुधन बीमा योजनाओं का लाभ पशुपालकों को मिल रहा है, लेकिन निजी बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम निपटान में अक्सर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उनका कहना है कि बीमा प्रीमियम का भुगतान Government करती है, इसलिए बीमा कंपनियों को दावों के निपटारे में अनावश्यक बाधाएं नहीं डालनी चाहिए और Government को इस दिशा में सख्ती बरतनी चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि पहले पशुपालन व्यवसाय को समाज में हीन भावना से देखा जाता था, लेकिन आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के कारण अब यह एक सम्मानजनक और लाभदायक व्यवसाय बन गया है. बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र की ओर आकर्षित हो रहे हैं तथा इसे एक स्थायी व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं. पहले जो चुनौतियां इस क्षेत्र में थीं, उनमें अब काफी हद तक कमी आई है.

वहीं, डेयरी अधिकारी सुधाकर प्रसाद ने समाचार एजेंसी से बातचीत में बताया कि Chief Minister योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए कई प्रभावी योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इन योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है और डेयरी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान समय में लगभग 20 हजार लीटर दूध का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है.

सुधाकर प्रसाद के अनुसार, जिले में 270 डेयरी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 7,250 सदस्य जुड़े हुए हैं. इनमें 1,200 महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

उन्होंने बताया कि समितियों के कंप्यूटरीकरण और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) व्यवस्था लागू होने से दुग्ध उत्पादकों के खातों में भुगतान सीधे पहुंच रहा है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी है. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य Government द्वारा संचालित योजनाएं दुग्ध उत्पादकों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही हैं और इनके माध्यम से डेयरी क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है.

एएसएच/डीकेपी

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