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Thursday, 22 October 2026
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फिल्ममेकिंग के भविष्य पर विक्रम भट्ट बोले- मुझे चिंता नहीं, बदलाव देखने के लिए मैं नहीं रहूंगा मौजूद

फिल्ममेकिंग के भविष्य पर विक्रम भट्ट बोले- मुझे चिंता नहीं, बदलाव देखने के लिए मैं नहीं रहूंगा मौजूद

Mumbai , 20 जून . फिल्ममेकर विक्रम भट्ट की फिल्म हॉन्टेड 3डी: इकोज ऑफ द पास्ट 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. विक्रम भट्ट इन दिनों फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं. इस बीच उन्होंने सिनेमा के तेजी से बदलते भविष्य पर अपने विचार साझा किए.

के साथ एक खास इंटरव्यू में विक्रम भट्ट ने इस बात पर अपनी राय व्यक्त की कि कैसे टेक्नोलॉजी और दर्शकों का व्यवहार लगातार इंडस्ट्री को बदल रहा है. फिल्म मेकिंग में बदलाव की रफ्तार के बारे में बात करते हुए उन्होंने माना कि भले ही यह माध्यम असाधारण तरीकों से बदलने वाला है, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि वे इसके भविष्य के सबसे बड़े बदलावों को देख पाएंगे.

जब विक्रम भट्ट से पूछा गया कि समय के साथ फिल्म बनाने का तरीका और दर्शकों की पसंद कैसे बदल रही है तो उन्होंने कहा, “अच्छी बात यह है कि मेरी उम्र ऐसी है कि मुझे यहां और ज्यादा साल नहीं बिताने हैं. इसलिए मुझे ज्यादा चिंता नहीं है. जब ऐसा समय आएगा कि कोई रील नहीं होगी और लोग सीधे चीजों को देख पाएंगे तो एक समय ऐसा भी आएगा जब लोग आंखें बंद कर कानों में चिप लगाकर फिल्म देखेंगे तो मैं वह समय नहीं देखूंगा, इसलिए मैं इतना आगे की नहीं सोच रहा हूं.”

विक्रम भट्ट हालिया रिलीज सुपरनैचुरल हॉरर फिल्म “हॉन्टेड 3डी: इकोज ऑफ़ द पास्ट” 2011 में आई फिल्म “हॉन्टेड – 3डी” का स्पिरिचुअल सीक्वल है. इस फिल्म में मिमोह चक्रवर्ती, चेतना पांडे, गौरव बाजपेयी, हेमंत पांडे, श्रुति प्रकाश और प्रणीत भट्ट ने काम किया है. फिल्म को आनंद पंडित, जावेद खान किंग और श्वेतांबरी भट्ट ने प्रोड्यूस किया है. महेश भट्ट इसके प्रजेंटर थे.

विक्रम भट्ट ‘1920’ फ्रैंचाइजी की अगली फिल्म ‘1920: कोल्ड विंटर’ को डायरेक्ट करने के लिए तैयार हैं. इस फिल्म को आनंद पंडित, रूपा पंडित और राहुल वी. दुबे मिलकर प्रोड्यूस करेंगे.

इससे पहले, डायरेक्टर ने इस बात का खुलासा किया था कि उन्हें बड़े पर्दे पर हॉरर कहानियां कहने की ओर क्या चीज आकर्षित करती है.

उन्होंने से ​​कहा, “मुझे सच में लगता है कि मेरा डर से एक कनेक्शन है. मुझे लगता है कि दुनिया में बाकी सभी भावनाओं की जड़ डर ही है. अगर आप ध्यान से देखें, तो किसी को खोने का डर ही ‘पजेसिवनेस’ (अधिकार की भावना) है. जरूरत से कम होने का डर लालच है. अकेले रह जाने का डर ही रिश्तों की वजह है. पीछे छूट जाने का डर ही कॉम्पिटिशन (प्रतिस्पर्धा) है. दुनिया डर से ही चलती है, लेकिन हममें से ज्यादातर लोग इसे डर नहीं समझते. हम इसे पजेसिवनेस, लालच वगैरह समझते हैं. अगर आप बहुत बारीकी से देखें, तो बहुत से लोग डर में ही जी रहे हैं.”

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एसएचके/वीसी

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