
मंदसौर, 23 जून . Rajasthan के प्रतापगढ़ की विश्वप्रसिद्ध थेवा आर्ट आज देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी खास पहचान बना रही है. इस पारंपरिक और दुर्लभ कला को Madhya Pradesh के मंदसौर निवासी शिल्पकार राकेश सोनी पिछले लगभग 25 वर्षों से जीवंत बनाए हुए हैं. अपनी मेहनत, लगन और बारीक कारीगरी के दम पर उन्होंने थेवा कला को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
राकेश सोनी ने से बताया कि उन्होंने यह कला अपने मामा से सीखी, जो Rajasthan के प्रतापगढ़ में रहते हैं और वर्षों से इस पारंपरिक शिल्पकला से जुड़े हुए हैं. अथक प्रयासों के बाद उन्होंने इस कला में महारत हासिल की. आज उनके द्वारा तैयार किए गए थेवा आर्ट के आभूषण और कलाकृतियां देशभर में भेजी जाती हैं और कला प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं.
थेवा कला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बारीक नक्काशी है. रंगीन कांच की सतह पर 23 कैरेट सोने से बेहद महीन डिजाइन तैयार किए जाते हैं, जो इसे अन्य हस्तकलाओं से अलग बनाते हैं. यही कारण है कि इस कला की मांग लगातार बढ़ रही है.
हाल ही में Prime Minister Narendra Modi की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान थेवा कला को वैश्विक पहचान मिली. Prime Minister मोदी ने स्लोवाकिया के President पीटर पेलेग्रिनी को प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध थेवा कला से निर्मित ‘थेवा मोटिफ कफलिंक्स’ भेंट किए थे. इन कफलिंक्स में रंगीन कांच पर सोने की बारीक नक्काशी की गई थी, जिसने भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया.
पीएम मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान से प्रेरित होकर देशभर के हस्तशिल्प कलाकारों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है. राकेश सोनी का कहना है कि Prime Minister के प्रयासों के कारण भारतीय पारंपरिक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है. इसी प्रेरणा से उन्होंने Prime Minister Narendra Modi के लिए थेवा आर्ट का एक विशेष ब्रोच तैयार किया है.
इस विशेष ब्रोच में थेवा कला की पारंपरिक बारीकियां, भारतीय संस्कृति की झलक और शिल्पकार की वर्षों की मेहनत समाहित है. राकेश सोनी की इच्छा है कि यह विशेष उपहार Prime Minister तक पहुंचे, ताकि वे मंदसौर के इस कलाकार की कला और समर्पण को भी करीब से जान सकें.
राकेश सोनी ने कहा, “मैं पिछले 25 साल से इस काम को कर रहा हूं. काफी प्रयासों के बाद मैंने इस कला को सीखा और आगे बढ़ाया है. इसमें बहुत बारीकी का काम होता है. एक सेट तैयार करने में लगभग तीन दिन का समय लगता है. यह करीब 400 साल पुरानी कला है और मुगल काल से चली आ रही है.”
उन्होंने Prime Minister मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि थेवा कला को जिस तरह उन्होंने वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है, उससे उन्हें बेहद खुशी हुई है. उन्होंने कहा कि इसके लिए वह Prime Minister का धन्यवाद करना चाहते हैं.
थेवा आर्ट Rajasthan के प्रतापगढ़ जिले की लगभग 400 वर्ष पुरानी विश्व प्रसिद्ध हस्तकला है. इस अनूठी कला में बहुरंगी कांच की सतह पर 23 कैरेट सोने की अत्यंत बारीक नक्काशी की जाती है. आज यह कला भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला की एक अनमोल पहचान बन चुकी है.
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वीकेयू/पीएम