बेलडांगा हिंसा मामला: 15 आरोपियों की सशर्त जमानत को एनआईए ने कलकत्ता हाईकोर्ट में दी चुनौती

कोलकाता, 20 अप्रैल . राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने Monday को बेलडांगा हिंसा मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. एजेंसी ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें 15 आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई थी.

एनआईए ने आरोप लगाया है कि Supreme Court के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए आरोपियों को जमानत दी गई. एजेंसी ने हाईकोर्ट में दावा किया कि निचली अदालत जांच के दौरान इस तरह से जमानत नहीं दे सकती.

इन 15 आरोपियों को जमानत तब मिली, जब एजेंसी 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रही.कानून के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों के खिलाफ एक तय समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करना जरूरी होता है, लेकिन 90 दिन बीत जाने के बाद भी एनआईए न तो कोई फाइनल चार्जशीट दाखिल कर पाई और न ही जांच से जुड़ी कोई प्रासंगिक रिपोर्ट पेश कर पाई. एजेंसी के अधिकारी जांच की प्रगति के बारे में अदालत के सवालों के जवाब देने में भी नाकाम रहे.

ऐसी स्थिति में, गिरफ्तार लोगों के वकीलों ने जमानत के लिए अर्जी दी. एक विशेष अदालत ने 15 आरोपियों को 10,000 रुपए के मुचलके पर सशर्त जमानत दे दी.

इस मामले की सुनवाई Tuesday को होगी, तब यह साफ हो जाएगा कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा या हाईकोर्ट के दखल से एनआईए को उन 15 लोगों की कस्टडी वापस मिल जाएगी.

Saturday को एनआईए की एक विशेष अदालत ने पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में इस साल की शुरुआत में भड़की हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार 35 आरोपियों में से 15 को सशर्त जमानत दे दी थी.

दरअसल, इस साल जनवरी में पड़ोसी राज्य Jharkhand में एक प्रवासी मजदूर की मौत को लेकर बेलडांगा में हिंसा और दंगे जैसी स्थिति पैदा हो गई थी. जब उस प्रवासी मजदूर का शव बेलडांगा पहुंचा, तो तनाव और भड़क गया.

स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उस प्रवासी मजदूर की Jharkhand में धार्मिक और भाषाई कारणों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. बेलडांगा में रेलवे और सड़कों को जाम करके विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.

Police द्वारा जाम हटाने की कोशिश पर प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर घात लगाकर हमला कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने कुछ पत्रकारों पर भी हमला किया, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए.

बाद में Jharkhand Police ने एक बयान जारी किया, जिसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रवासी मजदूर की मौत को आत्महत्या का मामला बताया गया.

क्रिकेटर से राजनेता बने और स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के Lok Sabha सदस्य यूसुफ पठान को इस बात के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा कि जब पूरा इलाका जल रहा था, तब वे न तो उस इलाके में मौजूद थे और न ही राज्य में.

बाद में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें बेलडांगा में केंद्रीय सशस्त्र Police बलों (सीएपीएफ) की तैनाती और इस मामले की जांच एनआईए को सौंपने की मांग की गई.

यह मामला Supreme Court तक पहुंचा, जिसने कलकत्ता हाईकोर्ट की बात से सहमति जताते हुए कहा कि यदि केंद्रीय गृह मंत्री इसे जरूरी समझते हैं, तो वे एनआईए को इस मामले की जांच शुरू करने के लिए कह सकते हैं. आखिरकार, एनआईए ने इस मामले की जांच शुरू कर दी.

एएसएच/वीसी

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