मनसे ने कल्याण डोंबिवली नगर निकाय में शिंदे गुट को समर्थन दिया

कल्याण, 21 जनवरी . कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केडीएमसी) चुनाव के बाद एक नाटकीय मोड़ में Maharashtra नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन दिया है.

इस कदम के पीछे की वजह बताते हुए मनसे के पूर्व विधायक राजू पाटिल ने Wednesday को साफ किया कि यह फैसला Political स्थिरता सुनिश्चित करने और सत्ता की लड़ाई के बजाय स्थानीय विकास को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है.

केडीएमसी में शिंदे गुट को समर्थन देने के मनसे के फैसले के बाद शिवसेना-यूबीटी को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि दोनों भाइयों ने बृहन्Mumbai नगर निगम और अन्य नागरिक निकायों के चुनाव ‘मराठी मानुष’ और मराठी पहचान के ‘हितों की रक्षा’ के साझा मुद्दे पर लड़े थे.

पार्टी के पार्षदों के समूह को रजिस्टर करने के बाद कोंकण भवन में मीडिया से बात करते हुए राजू पाटिल ने कहा, “संख्याओं का खेल और पाला बदलने का लगातार खतरा खत्म नहीं हो रहा था. यह अराजकता आने वाले समिति चुनावों में भी जारी रहने की संभावना थी. शहर में स्थिरता लाने के लिए हमने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया.”

मनसे ने सत्ताधारी पक्ष में शामिल होने का फैसला क्यों किया, इस सवाल का जवाब देते हुए पाटिल ने जोर दिया कि पार्टी के पांच पार्षद Government के अंदर रहकर जनता की बेहतर सेवा कर पाएंगे.

पाटिल ने आगे कहा, “कल्याण-डोंबिवली के लोग दल-बदल की राजनीति से थक चुके हैं. हमारा फैसला व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं है. सत्ता संरचना का हिस्सा बनकर हम निगरानी रख सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि विकास कार्य पूरे हों. हम जनहित पर केंद्रित एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) के साथ आगे बढ़ रहे हैं.”

पाटिल ने बताया कि स्थानीय नेतृत्व ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे को क्षेत्र के जटिल Political समीकरणों के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने कहा, “साहब (राज ठाकरे) ने हमसे कहा कि स्थानीय स्थिति के आधार पर जो भी फैसला जरूरी हो, वह लें. हमने उसी के अनुसार काम किया है.”

इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कि मनसे ने कई क्षेत्रों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, पाटिल ने कहा कि स्थानीय समीकरण अक्सर राज्य-स्तरीय गठबंधनों से अलग होते हैं.

उन्होंने बताया कि नतीजों के बाद कुछ पार्षद गायब हो गए थे, जिससे उनके अपने जीतने वाले उम्मीदवारों की सुरक्षा और अखंडता को लेकर चिंताएं पैदा हो गई थीं. मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि ऐसे गठबंधन ‘स्थानीय स्तर’ पर होते हैं.

केडीएमसी चुनाव में खंडित जनादेश आया था. 122 सदस्यों वाले कॉर्पोरेशन में, शिवसेना ने 53 सीटें जीतीं, जो भाजपा से थोड़ी ही ज्यादा थीं, जिसे 51 सीटें मिलीं. बहुमत का आंकड़ा 62 है, जिससे चुनाव के बाद समर्थन बहुत जरूरी हो गया है.

एससीएच/डीकेपी

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