असम और मेघालय विवादित भूमि पर खेती की अनुमति देने पर सहमत हुए

गुवाहाटी, 2 जून . असम और मेघालय ने Tuesday को विवादित लापंगाप क्षेत्र के निर्दिष्ट हिस्सों में स्थानीय निवासियों को खेती जारी रखने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की, जबकि स्थायी सीमांकन के मुद्दे को आगे की चर्चा के लिए राज्य स्तरीय समिति को सौंप दिया गया.

यह निर्णय लापांगप स्थित असम Police शिविर में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें दोनों राज्यों के वरिष्ठ Political नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, Police अधिकारियों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

इस व्यवस्था के तहत, लापंगाप गांव के लोग तलहटी के इलाकों में धान की खेती जारी रखेंगे, जबकि ताहपात के निवासियों को विवादित क्षेत्र की पहाड़ियों और ढलानों पर केले, अनानास और अदरक सहित मौसमी फसलें उगाने की अनुमति दी जाएगी.

बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों Governmentों ने सहमति व्यक्त की कि विवादित क्षेत्र में अंतिम सीमांकन के मुद्दे पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले संबंधित राज्य-स्तरीय समिति द्वारा विचार किया जाएगा. दोनों पक्षों ने संवेदनशील सीमा क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखने और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाली किसी भी गतिविधि से बचने की अपनी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की.

यह घटनाक्रम मेघालय के Chief Minister कॉनराड के. संगमा और असम के Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा के बीच लंबे समय से लंबित सीमा विवादों को संवाद और आपसी समझ के माध्यम से हल करने पर हुई हालिया चर्चा के बाद सामने आया है.

बैठक में मेघालय के प्रतिनिधिमंडल में उप Chief Minister स्त्रियावभलंग धर, प्रधान सचिव फ्रेडरिक आर. खारकोंगोर, आयुक्त और सचिव सिरिल वी. डिएंगडोह, जयंतिया हिल्स स्वायत्त जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य थोंबोर शिवत, पश्चिम जयंतिया हिल्स के उप आयुक्त अभिनव सिंह और Police अधीक्षक जगपाल सिंह धनोआ शामिल थे.

अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम जयंतिया हिल्स जिला प्रशासन द्वारा 18 मई को बुलाई गई ग्राम प्रतिनिधियों की पिछली बैठक विवादित क्षेत्र में वृक्षारोपण गतिविधियों को लेकर अलग-अलग विचारों के कारण आम सहमति तक पहुंचने में विफल रही.

इस नवीनतम समझौते को लापांगप में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, इसके साथ ही यह अंतर-राज्यीय सीमा के किनारे रहने वाले लोगों के आजीविका हितों की रक्षा भी करेगा.

एसएके/डीकेपी

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