1 लाख करोड़ रुपए के अर्बन फंड से बाजार आधारित फाइनेंसिंग के जरिए निवेश में चार गुना होगी वृद्धि: मनोहर लाल

New Delhi, 15 अप्रैल . केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने Wednesday को अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ) और क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (सीआरजीएसएस) की गाइडलाइंस लॉन्च कीं. उन्होंने कहा कि 1 लाख करोड़ रुपए का यह फंड बाजार आधारित फाइनेंसिंग के जरिए करीब चार गुना निवेश जुटाने के लिए बनाया गया है.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह फंड India के शहरी विकास के तरीके में बड़ा बदलाव लाएगा. इसका मकसद Governmentी फंड का उपयोग करके बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित करना और शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है.

उन्होंने आगे कहा कि India के शहर तेजी से आर्थिक विकास, इनोवेशन और रोजगार के केंद्र बन रहे हैं, ऐसे में ‘विकसित India 2047’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए बेहतर शहरी योजना, फाइनेंसिंग और गवर्नेंस जरूरी है.

मंत्री ने कहा कि एएमआरयूटी, स्वच्छ India मिशन और स्मार्ट सिटीज मिशन जैसे कार्यक्रमों ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, लेकिन अब अगले चरण में शहरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और निवेश के लिए तैयार होने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि 1 लाख करोड़ रुपए के इस फंड में केंद्र Government की सहायता प्रोजेक्ट लागत के 25 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत राशि म्यूनिसिपल बॉन्ड, बैंक लोन और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए जुटाई जाएगी.

कुल बजट में से 90,000 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट्स के लिए, 5,000 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए और 5,000 करोड़ रुपए सीआरजीएसएस के लिए रखे गए हैं.

सीआरजीएसएस का उद्देश्य छोटे शहरों, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों और पहाड़ी व उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों को बाजार से फंड जुटाने में मदद करना है.

यह फंड पुराने शहरों और बाजारों के पुनर्विकास, शहरी परिवहन, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी, गैर-मोटर चालित परिवहन, पानी एवं स्वच्छता और जलवायु के अनुकूल शहरी विकास जैसे प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करेगा.

मंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि उन्हें अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ानी होगी और बाजार-आधारित फंडिंग सिस्टम अपनाना होगा.

इस दौरान आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकिथला ने कहा कि India का शहरीकरण अब एक अहम चरण में प्रवेश कर रहा है, और यह फंड इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एक नया परिणाम-आधारित मॉडल पेश करता है.

कार्यक्रम में शहरों को वित्तीय संस्थानों, बैंकों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से जोड़ने के लिए एक ई-डायरेक्टरी भी लॉन्च की गई.

इसके अलावा, मंत्रालय और राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर डिजिटल हस्ताक्षर भी हुए, साथ ही वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेंट भी जारी किए गए.

Government के अनुसार, यह फंड वित्त वर्ष 2026 से 2031 तक लागू किया जाएगा और इसका उद्देश्य शहरों को विकास के बड़े केंद्र (ग्रोथ हब) में बदलना है.

डीबीपी

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